चेन्नई/जींद: भारतीय वायुसेना की भर्ती परीक्षा में कथित हाईटेक नकल और अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों के बैठने का मामला सामने आया है। चेन्नई के अवाडी स्थित एयर फोर्स स्टेशन में 2 अगस्त को आयोजित अग्निवीर वायु लिखित परीक्षा के दौरान कथित गड़बड़ी के मामले में हरियाणा के जींद जिले से जुड़े चार युवकों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों पर परीक्षार्थियों की जगह बतौर प्रॉक्सी बैठने और बेहद छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल करने में मदद करने का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जींद के थुआ गांव निवासी गौरव और सावन, जींद निवासी अनिल तथा अलेवा क्षेत्र के दीपक कुमार के रूप में हुई है। परीक्षा अग्निवीर योजना के तहत विभिन्न पदों की भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। इनमें लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) और कुछ मामलों में सिविलियन मैकेनिकल ट्रांसपोर्ट ड्राइवर के पद शामिल थे। केवल चार पदों के लिए आयोजित परीक्षा में देशभर से करीब 1,800 अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
एडमिट कार्ड की फोटो से खुला मामला
कथित नकल का खुलासा परीक्षा केंद्र पर हॉल टिकट और एडमिट कार्ड की कई स्तरों पर जांच के दौरान हुआ। बताया गया कि आरोपी शुरुआती सुरक्षा जांच पार कर परीक्षा कक्ष तक पहुंच गए थे। हालांकि, अंदर दूसरी जांच के दौरान एक निरीक्षक को एडमिट कार्ड पर लगी तस्वीर और परीक्षा दे रहे व्यक्ति के चेहरे में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया।
जांच में उस व्यक्ति की पहचान जींद के थुआ गांव निवासी 21 वर्षीय आर. गौरव के रूप में हुई। आरोप है कि वह एस. अमन कुमार की जगह परीक्षा दे रहा था। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और उसके ठहरने के स्थान की तलाशी ली गई। इसी दौरान तीन अन्य लोगों की कथित भूमिका सामने आई।
पुलिस के अनुसार, 27 वर्षीय अनिल कथित तौर पर सुनील की जगह परीक्षा देने पहुंचा था। वहीं 25 वर्षीय सावन और 24 वर्षीय दीपक कुमार पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल कराने का आरोप है।
कान में छिपाए थे बेहद छोटे उपकरण
जांच के दौरान सावन और दीपक के कानों से बेहद छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। आरोप है कि दोनों ने एक सेंटीमीटर से भी छोटे SIM-enabled GSM ईयरपीस कान के भीतर छिपा रखे थे। इन उपकरणों को परीक्षा केंद्र के बाहर से भेजे जाने वाले जवाब हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाना था।
अधिकारियों ने तलाशी में Bluetooth dual-SIM GSM बॉक्स, Bluetooth ईयरपीस, आठ मोबाइल फोन और 10 SIM कार्ड भी बरामद किए। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि परीक्षा केंद्र पर लगाया गया सिग्नल जैमर इन उपकरणों को प्रभावी ढंग से काम करने से रोक रहा था। इसके कारण आरोपियों को बाहर से कथित मदद नहीं मिल सकी।
₹50 हजार एडवांस मिलने का आरोप
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें प्रॉक्सी उम्मीदवार के रूप में परीक्षा देने या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल में मदद करने के लिए प्रत्येक को ₹50 हजार एडवांस दिए गए थे। आरोप है कि मूल अभ्यर्थियों के भर्ती प्रक्रिया में सफल होने और नौकरी हासिल करने के बाद बाकी रकम देने का वादा किया गया था।
चारों आरोपी एक साथ अवाडी पहुंचे थे और एक ही स्थान पर ठहरे हुए थे। उनके ठिकाने से कई बैगों में प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और उनसे जुड़े अन्य सामान बरामद किए गए।
बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच
प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने चारों आरोपियों को पुलिस के हवाले कर दिया। उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या आरोपी किसी बड़े अंतरराज्यीय परीक्षा-नकल नेटवर्क का हिस्सा हैं। जांच का फोकस उन मूल अभ्यर्थियों की पहचान पर भी है, जिन्होंने कथित तौर पर प्रॉक्सी उम्मीदवारों को परीक्षा देने के लिए तैयार किया था। इसके अलावा उन बिचौलियों की तलाश की जा रही है, जिन्होंने प्रॉक्सी उम्मीदवारों की व्यवस्था की और हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध कराए।
जांचकर्ता बरामद मोबाइल फोन, SIM कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और कथित परीक्षा-धोखाधड़ी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।
