गोरखपुर: साइबर जालसाजों ने बड़े उद्योगपतियों और फिल्मी सितारों की पहचान का इस्तेमाल कर गोरखपुर के 75 वर्षीय बुजुर्ग को कथित तौर पर ₹8 लाख से अधिक की ठगी का शिकार बना लिया। जंगल कौड़िया क्षेत्र के पीपीगंज निवासी लालमनी साहनी को वीडियो कॉल के जरिए एक व्यक्ति ने खुद को उद्योगपति मुकेश अंबानी बताया। आरोपियों ने उन्हें ₹10 लाख निवेश करने पर ₹40 करोड़ तक का रिटर्न मिलने का लालच दिया। बातचीत के दौरान ठगों ने अमिताभ बच्चन के भी मौजूद होने का दावा किया, जिससे निवेश की योजना को वास्तविक दिखाने की कोशिश की गई। भरोसे में आए लालमनी ने कई दिनों में अलग-अलग किस्तों में ₹8 लाख से अधिक रकम बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। जब न तो वादा किया गया रिटर्न मिला और न ही ठगों से संपर्क हो सका, तब उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला।
मामले में लालमनी ने बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों के साथ पीपीगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में उन बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनमें रकम भेजी गई थी। साथ ही आरोपियों के मोबाइल नंबर, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
वीडियो कॉल पर खुद को मुकेश अंबानी बताया
शिकायत के मुताबिक, साइबर जालसाजों ने लालमनी साहनी से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया। कॉल के दौरान एक आरोपी ने कथित तौर पर खुद को मुकेश अंबानी बताया। ठगों ने बातचीत को विश्वसनीय बनाने के लिए अमिताभ बच्चन का नाम भी लिया और दावा किया कि वह भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं।
आरोपियों ने बुजुर्ग को बताया कि करीब ₹10 लाख का निवेश करने पर उन्हें ₹40 करोड़ तक की रकम मिल सकती है। इतनी बड़ी रकम के लालच में लालमनी उनकी बातों पर विश्वास कर बैठे। इसके बाद ठगों ने निवेश की प्रक्रिया, भुगतान और अन्य बहानों के नाम पर उनसे लगातार रकम ट्रांसफर करानी शुरू कर दी।
कई किस्तों में भेजे ₹8 लाख से अधिक
लालमनी ने एक बार में पूरी रकम ट्रांसफर नहीं की। शिकायत के अनुसार, आरोपियों के निर्देश पर उन्होंने कई दिनों में अलग-अलग किस्तों में ₹8 लाख से ज्यादा रकम भेजी। हर बार उन्हें भरोसा दिलाया गया कि भुगतान निवेश प्रक्रिया का हिस्सा है और इसके बाद उन्हें करोड़ों रुपये का रिटर्न मिल जाएगा।
जब लंबे समय तक वादे के मुताबिक रकम नहीं मिली तो लालमनी को संदेह हुआ। उन्होंने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बाद में संपर्क पूरी तरह बंद हो गया। इसके बाद उन्हें समझ आया कि वीडियो कॉल पर दिखाई गई पहचान और निवेश का प्रस्ताव कथित धोखाधड़ी का हिस्सा था।
बैंक स्टेटमेंट लेकर थाने पहुंचे
ठगी का पता चलने के बाद लालमनी ने बैंक से अपने खाते का लेनदेन विवरण हासिल किया और पुलिस से संपर्क किया। पीपीगंज पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब रकम प्राप्त करने वाले बैंक खातों की जांच कर रही है। इन खातों से आगे रकम किन खातों में भेजी गई, इसका भी पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल, डिजिटल भुगतान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि वीडियो कॉल करने वाले आरोपी कौन हैं और क्या उनके पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह काम कर रहा है।
पहचान की नकल बनाकर भरोसा जीत रहे ठग
साइबर अपराधियों की ओर से चर्चित उद्योगपतियों, फिल्मी सितारों और सरकारी अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति का चेहरा दिखाई देना उसकी वास्तविक पहचान की गारंटी नहीं है। तकनीक की मदद से तस्वीर, आवाज और वीडियो में बदलाव कर किसी दूसरी शख्सियत की नकल की जा सकती है।
साइबर अपराध के मामलों में renowned cyber crime expert and former IPS officer Prof. Triveni Singh के विश्लेषण के अनुसार, निवेश का प्रस्ताव देने वाले व्यक्ति की पहचान और उसके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। खास तौर पर जब कोई व्यक्ति बहुत कम निवेश के बदले असाधारण रिटर्न का दावा करे, तो इसे गंभीर चेतावनी संकेत मानना चाहिए।
करोड़ों के रिटर्न के दावे से रहें सावधान
विशेषज्ञों के मुताबिक, ₹10 लाख के निवेश पर ₹40 करोड़ मिलने जैसा दावा अपने आप में संदेह पैदा करने वाला है। अनजान व्यक्ति के कहने पर किसी बैंक खाते में रकम ट्रांसफर नहीं करनी चाहिए। बैंकिंग पासवर्ड, एटीएम विवरण, यूपीआई पिन और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी भी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति खुद को बड़ा कारोबारी, सरकारी अधिकारी या सेलिब्रिटी बताकर निवेश का प्रस्ताव देता है, तो उसकी पहचान और प्रस्ताव की विश्वसनीयता की स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि करनी चाहिए। साइबर ठगी होने का संदेह होते ही बैंक और पुलिस को तत्काल सूचना देना जरूरी है, ताकि लेनदेन को ट्रेस करने और रकम की संभावित रिकवरी की कार्रवाई समय रहते शुरू की जा सके।
