नावेलिम की महिला की शिकायत पर मडगांव टाउन पुलिस ने शुरू की जांच; चेक, एटीएम कार्ड और पिन हासिल कर रकम निकालने तथा पेंशन के आधार पर ₹3 लाख का ऋण लेने का आरोप

बिहार में ‘फर्जी IAS’ बनकर घूम रहा था शख्स, खुद को NSA अजीत डोभाल का ‘अंडरकवर एजेंट’ बताता था; ₹100 करोड़ से अधिक की संपत्ति का दावा

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By Roopa
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पटना: बिहार के खगड़िया जिले में खुद को IAS अधिकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का ‘अंडरकवर एजेंट’ बताकर लोगों पर रौब जमाने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान मनीष कुमार गुप्ता उर्फ चिक्कू के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी लंबे समय से फर्जी सरकारी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करता था और खुद को केंद्र सरकार से जुड़ा अधिकारी बताकर कथित तौर पर कई जिलों में लोगों को अपने प्रभाव में लेता था। जांच के दौरान उसकी संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े ऐसे सुराग भी मिले हैं, जिनके आधार पर ₹100 करोड़ से अधिक की कथित संपत्ति की जांच की जा रही है।

मनीष की गिरफ्तारी गोगरी थाना क्षेत्र के जमालपुर बाजार स्थित उसके ठिकाने पर शनिवार को की गई छापेमारी के बाद हुई। जिला जांच इकाई और गोगरी पुलिस की संयुक्त टीम ने करीब साढ़े सात घंटे तक परिसर की तलाशी ली। इस दौरान कई ऐसी चीजें बरामद हुईं, जिनसे उसके कथित फर्जी सरकारी रुतबे और आर्थिक गतिविधियों की पड़ताल का दायरा बढ़ गया है।

लग्जरी गाड़ियों पर लिखवाया था ‘IAS’ और ‘भारत सरकार’

तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से दो लग्जरी वाहन बरामद किए गए। दोनों वाहनों पर ‘Government of India’ यानी ‘भारत सरकार’ से जुड़े निशान और पहचान प्रदर्शित की गई थी। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन वाहनों का वास्तविक मालिक कौन है और उन पर सरकारी पहचान से जुड़े चिन्ह लगाने की अनुमति आरोपी को किस आधार पर मिली थी।

पुलिस के अनुसार, मनीष कथित तौर पर अपनी पहचान को प्रभावशाली बनाने के लिए खुद को IAS अधिकारी बताता था। इसके साथ ही वह यह दावा करता था कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के लिए ‘कवर एजेंट’ या ‘अंडरकवर एजेंट’ के तौर पर काम करता है। इन दावों की वास्तविकता और उनके जरिए आरोपी ने किन लोगों से संपर्क बनाया, इसकी भी जांच की जा रही है।

31 लीटर विदेशी शराब, महंगी बोतल भी मिली

छापेमारी के दौरान करीब 31 लीटर विदेशी शराब बरामद होने की बात सामने आई है। इसमें एक ऐसी बोतल भी शामिल है, जिसकी कीमत कथित तौर पर ₹1 लाख से अधिक बताई गई है। शराब की बरामदगी के बाद आरोपी के खिलाफ बिहार के शराबबंदी और उत्पाद कानून के तहत अलग से मामला दर्ज किया गया है।

तलाशी में पुलिस को पांच एप्पल मोबाइल फोन, 20 क्रेडिट कार्ड, आठ डेबिट कार्ड और चार चेकबुक भी मिलीं। इसके अलावा कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस इन दस्तावेजों और बैंकिंग साधनों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी की आर्थिक गतिविधियों का नेटवर्क कितना बड़ा था।

हिरण और बारहसिंगा के सींग भी मिले

छापेमारी के दौरान हिरण और बारहसिंगा के सींग मिलने से जांच का एक और पहलू सामने आया है। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि ये सींग आरोपी के पास कैसे पहुंचे और इनके संबंध में वन्यजीव संरक्षण कानूनों का कोई उल्लंघन तो नहीं हुआ।

₹100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति की जांच

पुलिस अब मनीष गुप्ता की कथित संपत्तियों, वाहनों, बैंकिंग लेनदेन और बरामद दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है। उसकी संपत्ति का स्रोत पता लगाने के लिए राज्य की आर्थिक अपराध इकाई से सहयोग मांगा गया है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी सरकारी पहचान का इस्तेमाल करके कहीं अवैध तरीके से धन या संपत्ति तो अर्जित नहीं की।

बरामद लग्जरी वाहनों को जब्त कर गोगरी थाने में रखा गया है। पुलिस वाहनों पर लगे सरकारी चिन्हों और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की भी पुष्टि कर रही है।

मनीष के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में फर्जी पहचान और सरकारी पद से जुड़े प्रतीकों के कथित दुरुपयोग समेत अन्य आरोपों की जांच की जा रही है। बरामद मोबाइल फोन, कार्ड, चेकबुक और दस्तावेजों के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज की भी पड़ताल की जा रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि आरोपी ने खुद को IAS अधिकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के कथित एजेंट के रूप में पेश कर कितने लोगों को प्रभावित किया और इस पहचान का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया।

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