लखनऊ: शहर के एक कारोबारी के डिमैट खाते से कथित तौर पर ₹37 करोड़ की रकम निकालने के मामले में निजी बैंकिंग और सिक्योरिटीज समूह से जुड़े दो पूर्व अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। कारोबारी अमित अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना खाते से रकम निकालने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। घोटाले का पता जनवरी 2026 में हुए ऑडिट के दौरान चलने का दावा किया गया है।
मामले में गाजीपुर थाने में कोर्ट के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया गया। कारोबारी की शिकायत के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2023 में ट्रेडिंग और निवेश के उद्देश्य से करीब ₹13 करोड़ की रकम खाते में स्थानांतरित की थी। निवेश और कारोबार के बाद उनके डिमैट खाते में रकम बढ़कर करीब ₹37 करोड़ हो गई। आरोप है कि बाद में खाते में मौजूद पूरी रकम को कथित तौर पर अनधिकृत लेनदेन के माध्यम से निकाल लिया गया।
फर्जी दस्तावेज से लेनदेन कराने का आरोप
अमित अग्रवाल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि रकम निकालने की प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए उनके नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इसके अलावा खाते से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में भी कथित तौर पर बदलाव किया गया। आरोप है कि इन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल अनधिकृत लेनदेन को वैध दिखाने के लिए किया गया।
कारोबारी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता शिवांग द्विवेदी ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में दस्तावेजों की कथित जालसाजी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ महत्वपूर्ण भूमिका में रही। उनके मुताबिक, जनवरी 2026 में कराए गए ऑडिट के दौरान खाते में हुई कथित अनियमितताओं का पता चला। इसके बाद कारोबारी ने संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।
शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का दावा
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रारंभिक स्तर पर शिकायत देने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। अदालत के निर्देश के बाद गाजीपुर थाने में दोनों पूर्व अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
मामले में आरोपी दोनों व्यक्ति उस समय संबंधित वित्तीय संस्थानों से जुड़े हुए थे, जब कारोबारी का डिमैट खाता वहां संचालित हो रहा था। हालांकि, FIR में लगाए गए आरोपों की जांच अभी शुरुआती चरण में है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित लेनदेन किस प्रक्रिया के तहत किए गए तथा इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
बैंक और वित्तीय संस्थानों से मांगे जाएंगे रिकॉर्ड
जांच के दौरान पुलिस कारोबारी से लेनदेन से जुड़े बैंक और डिमैट रिकॉर्ड, कथित फर्जी दस्तावेज तथा अन्य संबंधित कागजात जुटाएगी। इसके साथ ही संबंधित वित्तीय संस्थानों से खाते से जुड़े दस्तावेज, लेनदेन का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक जानकारी मांगी जा सकती है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि ₹37 करोड़ की रकम किन खातों में स्थानांतरित हुई, लेनदेन किस माध्यम से किए गए और उन्हें अधिकृत करने के लिए कौन से दस्तावेज या डिजिटल प्रमाणीकरण इस्तेमाल किए गए। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के आरोपों की तकनीकी जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस के मुताबिक, फिलहाल फर्जीवाड़े, अनधिकृत निकासी और डिजिटल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ से जुड़े आरोपों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जांच के बाद स्पष्ट होगी आरोपों की तस्वीर
मामले में अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस लेनदेन और दस्तावेजों की जांच के साथ यह भी पता लगाएगी कि शिकायत में बताए गए ₹37 करोड़ के नुकसान की वास्तविक स्थिति क्या है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपों की पुष्टि संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
डिमैट खाते में बड़ी रकम की कथित अनधिकृत निकासी का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल धन हस्तांतरण ही नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से संभावित छेड़छाड़ के आरोप भी शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रकम निकालने की पूरी प्रक्रिया कैसे अंजाम दी गई और कथित फर्जीवाड़े में दोनों पूर्व अधिकारियों की वास्तविक भूमिका क्या थी।
