चेन्नई: तमिलनाडु में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए राज्यव्यापी अभियान में चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) की साइबर क्राइम विंग ने 15 साइबर धोखाधड़ी के मामलों में 37 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान पुलिस ने ऐसे बैंक खातों का पता लगाया, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया। इन खातों को आम तौर पर “मनी म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।
जांच में पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ट्रेडिंग और अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों से कथित तौर पर निकाली गई रकम के वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया। अधिकारियों ने पीड़ितों के बैंक खातों से रकम के निकलने के बाद उसके अलग-अलग लाभार्थी खातों तक पहुंचने की प्रक्रिया का पता लगाया। इसके आधार पर ऐसे खाताधारकों की पहचान की गई, जिनके खाते कथित तौर पर साइबर अपराध नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
350 संदिग्ध खाताधारकों की सूची
जांच के दौरान साइबर क्राइम विंग ने पूरे तमिलनाडु में करीब 350 संदिग्ध बैंक खाताधारकों की सूची तैयार की। राज्य के विभिन्न जिलों की पुलिस इकाइयों की मदद से इन लोगों की पहचान कर उनसे पूछताछ की गई। पुलिस ने करीब 120 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच लाया।
जांचकर्ताओं ने संदिग्धों की बैंकिंग गतिविधियों, लेनदेन के पैटर्न और साइबर अपराध से जुड़े लोगों के साथ संभावित संबंधों की पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि कई लोगों ने कथित तौर पर कमीशन के बदले अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराए थे।
कमीशन के बदले खाते देने का आरोप
पुलिस के अनुसार, कुछ संदिग्धों ने अपने बैंक खातों का इस्तेमाल दूसरे लोगों को करने दिया और इसके बदले कमीशन हासिल किया। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को पहले जमा कराने और फिर दूसरे खातों में ट्रांसफर करने या नकद निकालने के लिए किया जा सकता है।
कुछ अन्य संदिग्धों पर साइबर अपराधियों और संगठित अपराध नेटवर्क के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने या ऐसे नेटवर्क से संपर्क बनाए रखने का संदेह है। जांचकर्ताओं का मानना है कि साइबर ठग अक्सर सीधे अपने नाम के बैंक खातों का इस्तेमाल करने से बचते हैं। इसके बजाय वे दूसरे लोगों के खातों के जरिए रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित करते हैं, जिससे धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
मनी म्यूल अकाउंट साइबर अपराध की वित्तीय श्रृंखला में अहम कड़ी बन सकते हैं। कई मामलों में खाताधारकों को आसान कमीशन या जल्दी कमाई का लालच देकर अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जाता है। इसके बाद उसी खाते में बड़ी रकम जमा हो सकती है, जिसका संबंध किसी साइबर धोखाधड़ी से हो सकता है।
पूछताछ के बाद 37 गिरफ्तार
चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच में पूछताछ के बाद जांचकर्ताओं ने 37 ऐसे लोगों की पहचान की, जिनकी कथित भूमिका गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त मानी गई। सभी गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
वहीं, पूछताछ किए गए बाकी लोगों को इस चरण में गिरफ्तार नहीं किया गया। उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 41-A के तहत नोटिस जारी किए गए। इन नोटिस के माध्यम से उन्हें जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर जांचकर्ताओं के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
नोटिस पर छोड़े गए लोगों की भूमिका की जांच समाप्त नहीं हुई है। पुलिस उनके बैंक लेनदेन, डिजिटल गतिविधियों और अन्य संदिग्धों के साथ संभावित संबंधों की आगे भी जांच कर सकती है।
वित्तीय ट्रेल से नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश
पूरी कार्रवाई में साइबर अपराध की जांच के दौरान वित्तीय ट्रेल को ट्रैक करने की बढ़ती भूमिका सामने आई है। डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश और अन्य साइबर धोखाधड़ी में ठगी की रकम अक्सर कई बैंक खातों से होकर गुजरती है। रकम को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर उसकी वास्तविक दिशा छिपाने की कोशिश की जा सकती है।
पीड़ित के खाते से रकम निकलने के बाद वह किन खातों में पहुंची, किसने उसे आगे ट्रांसफर किया और आखिरकार रकम का लाभ किसे मिला—इन सवालों के जवाब तलाशना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। इससे उन लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है जो सीधे पीड़ितों से संपर्क किए बिना साइबर अपराध नेटवर्क को वित्तीय ढांचा उपलब्ध कराते हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल संपर्क और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य ठगी की रकम के स्रोत और अंतिम गंतव्य का पता लगाने के साथ-साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करना भी है।
तमिलनाडु में हुई यह कार्रवाई इस बात को भी रेखांकित करती है कि कमीशन या आसान कमाई के बदले किसी दूसरे व्यक्ति को बैंक खाता उपलब्ध कराना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। यदि ऐसे खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने या ट्रांसफर करने में होता है, तो खाताधारक भी जांच और कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
15 मामलों में 37 गिरफ्तारियों के बाद अब जांच एजेंसियों का फोकस साइबर अपराध नेटवर्क की वित्तीय संरचना को तोड़ने, ठगी की रकम को ट्रैक करने और मनी म्यूल के जरिए संचालित अन्य खातों की पहचान करने पर है। आगे की जांच से इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और 15 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की अतिरिक्त कड़ियां सामने आने की संभावना है।
