लखनऊ: राजधानी लखनऊ में एक कारोबारी के डीमैट अकाउंट से करीब ₹29 करोड़ की रकम कथित तौर पर निकालने के मामले में पुलिस ने ICICI बैंक के पूर्व मैनेजर और ICICI Securities के पूर्व रीजनल हेड के खिलाफ FIR दर्ज की है। दोनों पर कारोबारी की जानकारी के बिना खाते से रकम निकालने, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कथित हेरफेर करने और उनके नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप लगाए गए हैं। गाजीपुर पुलिस ने अदालत के आदेश के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला गाजीपुर इलाके के एक कारोबारी अमित अग्रवाल की शिकायत से जुड़ा है। इंदिरा नगर के सेक्टर-14 निवासी अमित अग्रवाल ने बताया कि उनका गाजीपुर स्थित ICICI बैंक में बैंक खाता है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए उन्होंने इसी बैंक के माध्यम से डीमैट अकाउंट खुलवाया था। कारोबारी के मुताबिक, मई 2023 में उन्होंने अपने बैंक खाते से करीब ₹13 करोड़ निकालकर अलीगंज स्थित ICICI Securities में निवेश और ट्रेडिंग के उद्देश्य से ट्रांसफर किए थे।
शिकायत के अनुसार, निवेश के बाद उनके डीमैट अकाउंट में रकम बढ़ती गई और 1 अप्रैल 2024 तक मुनाफे समेत करीब ₹29 करोड़ जमा हो गए। कारोबारी का आरोप है कि इसके बाद बैंक और ब्रोकिंग कंपनी से जुड़े दो पूर्व अधिकारियों ने कथित मिलीभगत से उनके डीमैट अकाउंट से पूरी रकम निकाल ली। आरोप है कि यह लेनदेन उनकी जानकारी या अनुमति के बिना किया गया।
इस मामले में ICICI बैंक गाजीपुर शाखा के पूर्व मैनेजर अमन अजीत और अलीगंज स्थित ICICI Securities के पूर्व रीजनल हेड विशाल आर्या को आरोपी बनाया गया है। कारोबारी ने आरोप लगाया है कि दोनों ने मिलकर रकम निकालने की प्रक्रिया को अंजाम दिया। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कथित तौर पर बदलाव किए गए और उनके नाम पर ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए, जिनका इस्तेमाल रकम निकालने के लिए किया गया।
ऑडिट के दौरान सामने आया कथित फर्जीवाड़ा
अमित अग्रवाल के मुताबिक, उन्हें अपने डीमैट अकाउंट से इतनी बड़ी रकम निकाले जाने की जानकारी काफी समय बाद हुई। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी 2026 को हुए ऑडिट के दौरान कथित अनियमितता सामने आई। रिकॉर्ड की जांच के बाद उन्हें पता चला कि उनके खाते से करीब ₹29 करोड़ की रकम निकाली जा चुकी थी।
कारोबारी का दावा है कि कथित फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। उनका आरोप है कि डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव कर लेनदेन को इस तरह दिखाने की कोशिश की गई, जिससे रकम निकाले जाने की वास्तविक प्रक्रिया तुरंत सामने न आए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद कारोबारी ने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। हालांकि, शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने अदालत का रुख किया। अदालत के निर्देश के बाद गाजीपुर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर ली।
पुलिस अब मामले से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, डीमैट अकाउंट की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक लॉग, दस्तावेज और कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर से संबंधित तकनीकी साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि ₹29 करोड़ की रकम किस माध्यम से निकाली गई और उसके बाद धनराशि कहां ट्रांसफर हुई।
पुलिस का कहना है कि मामले से संबंधित दस्तावेज शिकायतकर्ता और संबंधित संस्थानों से लिए जाएंगे। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल FIR में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
यह मामला वित्तीय संस्थानों और निवेश खातों में डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाता है। खासकर बड़ी रकम वाले डीमैट खातों में किसी भी अनधिकृत लेनदेन का पता लगाने के लिए नियमित ऑडिट, ट्रांजैक्शन अलर्ट और रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है। पुलिस की जांच से अब यह स्पष्ट होगा कि कथित तौर पर रकम निकालने की प्रक्रिया कैसे हुई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका थी या नहीं।
