डोडा के कई लोगों से विदेश में रोजगार और वीजा दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप; मुख्य आरोपी बिलाल अहमद समेत चार लोगों की भूमिका जांच के घेरे में, बैंक खातों के जरिए मनी ट्रेल खंगाल रही एजेंसी

दुबई में नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी, क्राइम ब्रांच की SCW ने दर्ज की FIR

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By Roopa
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जम्मू: जम्मू-कश्मीर में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच जम्मू की स्पेशल क्राइम विंग (SCW) ने डोडा जिले के कई निवासियों की संयुक्त शिकायत के आधार पर कथित ओवरसीज वीजा और रोजगार धोखाधड़ी मामले में FIR दर्ज की है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें दुबई में नौकरी और वीजा दिलाने का भरोसा देकर बड़ी रकम वसूली गई, लेकिन वादे के मुताबिक रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया।

क्राइम ब्रांच के अनुसार, शिकायत में मुख्य आरोपी के तौर पर डोडा के डाचन क्षेत्र के रहने वाले बिलाल अहमद का नाम सामने आया है, जो फिलहाल दुबई में रह रहा है। आरोप है कि बिलाल अहमद ने विदेश में नौकरी दिलाने और वीजा की व्यवस्था कराने का भरोसा देकर नौकरी तलाश रहे लोगों को अपने झांसे में लिया। उसके आश्वासन पर शिकायतकर्ताओं ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। अब जांच एजेंसी इन लेनदेन और आरोपियों के बीच संबंधों की विस्तृत पड़ताल कर रही है।

प्रारंभिक जांच के दौरान क्राइम ब्रांच को कथित वित्तीय लेनदेन की ऐसी कड़ियां मिलीं, जिनसे पता चला कि शिकायतकर्ताओं से प्राप्त रकम तीन अन्य लोगों के बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजी गई। जांच में यासिर अरफात, आशिक हुसैन और मोइन खान के नाम सामने आए हैं। एजेंसी को प्रथम दृष्टया आशंका है कि ये तीनों लोग मुख्य आरोपी के साथ समन्वय कर कथित धोखाधड़ी में भूमिका निभा रहे थे। हालांकि, उनकी वास्तविक भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

जांच एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक तथ्यों से विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर नौकरी के इच्छुक लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाने वाली एक संगठित साजिश की संभावना सामने आई है। शिकायतकर्ताओं से रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई गई और इसके बाद धन के स्थानांतरण की प्रक्रिया अपनाई गई। इसी आधार पर मामले में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई है।

अब जांच का प्रमुख फोकस पैसों के पूरे प्रवाह का पता लगाने पर है। क्राइम ब्रांच यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायतकर्ताओं से प्राप्त रकम किन खातों में गई, वहां से आगे किन खातों में ट्रांसफर की गई और अंततः उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। बैंकिंग रिकॉर्ड, लेनदेन का विवरण और आरोपियों के बीच संपर्क से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित नेटवर्क ने अन्य नौकरी तलाशने वालों को भी निशाना बनाया या नहीं।

मामले में बिलाल अहमद के दुबई में होने के कारण जांच में विदेश कनेक्शन भी महत्वपूर्ण हो गया है। जांचकर्ता यह स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित नौकरी और वीजा की पेशकश के पीछे वास्तव में कोई रोजगार अवसर मौजूद था या केवल रकम वसूलने के लिए फर्जी दावे किए गए थे। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि आरोपियों ने किसी कंपनी, एजेंसी या विदेशी नियोक्ता के नाम का इस्तेमाल किया था या नहीं।

क्राइम ब्रांच ने इस मामले के बाद विदेश में नौकरी और वीजा दिलाने का दावा करने वाले व्यक्तियों तथा एजेंसियों से सावधान रहने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि किसी भी एजेंट को भुगतान करने से पहले उसकी विश्वसनीयता, पंजीकरण और संबंधित रोजगार प्रस्ताव की स्वतंत्र रूप से जांच करें। सरकारी स्तर पर उपलब्ध अधिकृत माध्यमों से एजेंट और नौकरी की जानकारी सत्यापित करने के बाद ही कोई वित्तीय लेनदेन किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी में अक्सर आकर्षक वेतन, तत्काल वीजा और विदेश पहुंचने के बाद निश्चित रोजगार जैसे दावे करके बेरोजगार युवाओं और नौकरी तलाशने वालों को भरोसे में लिया जाता है। इसके बाद अलग-अलग शुल्क, वीजा खर्च या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ली जाती है। ऐसे मामलों में बैंक खाते और डिजिटल भुगतान माध्यम जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।

क्राइम ब्रांच ने संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर लोगों से तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या संबंधित क्राइम ब्रांच इकाई को सूचना देने को कहा है। जांच एजेंसी अब आरोपियों की भूमिका, कथित साजिश, बैंक खातों के नेटवर्क और विदेश में मौजूद संपर्कों की जांच कर रही है। मामले में सामने आने वाले वित्तीय और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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