मेरठ: उत्तर प्रदेश में एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग कर विदेशी भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। आयकर विभाग के पूर्व प्रधान मुख्य आयुक्त एवं भारत सरकार में सचिव स्तर से सेवानिवृत्त अधिकारी असित सिंह के HSBC प्रीमियर क्रेडिट कार्ड से उनकी जानकारी और अनुमति के बिना 586.23 अमेरिकी डॉलर (करीब ₹51,000) का लेनदेन कर दिया गया। शिकायत मिलने के बाद मेरठ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार, नोएडा के सेक्टर-44 निवासी असित सिंह निजी कार्य से मेरठ आए हुए थे। बुधवार दोपहर करीब 12:27 बजे उनके मोबाइल फोन पर संदेश प्राप्त हुआ कि उनके HSBC प्रीमियर क्रेडिट कार्ड से Hertz Car Rental के नाम पर 586.23 अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया गया है। शिकायत के अनुसार, उन्होंने ऐसा कोई भुगतान नहीं किया था और न ही किसी को इस लेनदेन की अनुमति दी थी।
संदेश मिलते ही असित सिंह ने तत्काल अपने बैंक से संपर्क कर क्रेडिट कार्ड को ब्लॉक करा दिया और विवादित लेनदेन पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया। समय रहते उठाए गए इस कदम से संभावित अतिरिक्त अनधिकृत ट्रांजैक्शन को रोका जा सका। इसके साथ ही बैंक ने भी अपने स्तर पर धोखाधड़ी से जुड़े मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कार्रवाई शुरू कर दी।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि साइबर अपराधियों ने किसी माध्यम से क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल कर उसका दुरुपयोग किया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कार्ड का विवरण फिशिंग, डेटा चोरी, ऑनलाइन समझौता, किसी डेटा लीक या अन्य साइबर माध्यम से अपराधियों तक पहुंचा था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि विवादित भुगतान भारत से किया गया या विदेश से तथा इसके पीछे किसी संगठित साइबर गिरोह की भूमिका तो नहीं है।
जिस कंपनी के नाम पर यह भुगतान हुआ, Hertz Car Rental, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार किराये पर उपलब्ध कराने वाली कंपनी है, जिसकी सेवाएं अमेरिका सहित कई देशों और भारत के प्रमुख शहरों व हवाई अड्डों पर भी उपलब्ध हैं। जांचकर्ता यह सत्यापित कर रहे हैं कि भुगतान वास्तव में किसी वाहन किराये की सेवा के लिए किया गया था या फिर व्यापारी के नाम का उपयोग किसी जटिल कार्ड धोखाधड़ी योजना के तहत किया गया।
मेरठ साइबर पुलिस ने मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड, पेमेंट गेटवे लॉग, बैंकिंग विवरण, डिवाइस पहचान, आईपी एड्रेस तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भुगतान किस मोबाइल नंबर, अकाउंट या डिजिटल माध्यम से किया गया।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आज साइबर अपराधी फिशिंग ईमेल, फर्जी वेबसाइट, मैलवेयर, स्किमिंग और डेटा लीक जैसी तकनीकों के माध्यम से क्रेडिट कार्ड की जानकारी चुराकर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की सूचना मिलते ही तुरंत कार्ड ब्लॉक कराएं, बैंक को सूचित करें, रियल-टाइम ट्रांजैक्शन अलर्ट सक्रिय रखें, नियमित रूप से बैंक स्टेटमेंट की जांच करें और किसी भी अविश्वसनीय वेबसाइट या प्लेटफॉर्म पर कार्ड संबंधी जानकारी साझा करने से बचें। उन्होंने यह भी कहा कि संदिग्ध विदेशी लेनदेन की सूचना बिना देरी के बैंक और पुलिस दोनों को देना आवश्यक है, ताकि आगे होने वाले वित्तीय नुकसान को रोका जा सके।
पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर भुगतान के स्रोत तथा इसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
