कानपुर/उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव निवासी एक वरिष्ठ नागरिक के साथ फ्लैट दिलाने के नाम पर ₹23 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि खुद को बिल्डर बताने वाले व्यक्ति ने आवास उपलब्ध कराने का भरोसा देकर उनसे जीवनभर की जमा पूंजी ले ली, लेकिन न तो फ्लैट उपलब्ध कराया और न ही रकम वापस की। लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के बाद पीड़ित ने पुलिस आयुक्त से शिकायत की, जिसके निर्देश पर कानपुर के नवाबगंज थाने में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता अशोक कुमार गुप्ता उन्नाव जिले के विकास नगर क्षेत्र के कब्बा खेड़ा के निवासी हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि वर्ष 2022 में उनकी मुलाकात कानपुर निवासी सत्यम गुप्ता उर्फ कपिल से हुई थी। आरोपी ने स्वयं को बिल्डर बताते हुए उन्हें एक फ्लैट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। भरोसा जीतने के बाद उसने अलग-अलग किस्तों में कुल ₹23 लाख ले लिए। शिकायत के अनुसार, इसमें ₹15 लाख ऑनलाइन बैंकिंग माध्यम से ट्रांसफर किए गए, जबकि ₹8 लाख नकद दिए गए, जिसकी लिखित रसीद भी उनके पास मौजूद है।
पीड़ित का आरोप है कि पूरी रकम लेने के बाद आरोपी लगातार फ्लैट देने का आश्वासन देता रहा, लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो फ्लैट का आवंटन किया गया और न ही कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध कराया गया। जब उन्होंने अपनी राशि वापस मांगी तो आरोपी हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर मामला टालता रहा। बाद में उसने कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया और शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिए, जिससे उनसे संपर्क पूरी तरह टूट गया।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि पीड़ित के पास ऑनलाइन भुगतान से संबंधित बैंक रिकॉर्ड, नकद भुगतान की लिखित रसीद, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना है कि ऑडियो रिकॉर्डिंग में आरोपी कथित तौर पर रकम प्राप्त करने की बात स्वीकार करता सुनाई देता है। पुलिस अब इन सभी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि लेनदेन और आरोपों की सत्यता की पुष्टि की जा सके।
अशोक कुमार गुप्ता का कहना है कि उन्होंने इस मामले में पहले स्थानीय पुलिस से भी संपर्क किया था। इसके अलावा उन्होंने एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) सहित अन्य माध्यमों से भी शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। लगातार प्रयासों के बाद उन्होंने कानपुर पुलिस आयुक्त के समक्ष पूरा मामला रखा। शिकायत में उपलब्ध दस्तावेजों और प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर पुलिस आयुक्त ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
निर्देश मिलने के बाद नवाबगंज थाने में आरोपी के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान बैंक खातों में हुए लेनदेन, उपलब्ध दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेज भी एकत्र किए जाएंगे ताकि धन के प्रवाह और कथित धोखाधड़ी की पूरी श्रृंखला स्पष्ट हो सके।
प्रारंभिक जांच में पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाया या इसी प्रकार के अन्य मामलों में भी उसकी भूमिका रही है। यदि जांच के दौरान अन्य पीड़ितों या अतिरिक्त वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य मिलते हैं तो मामले में धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं और अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि किसी भी संपत्ति की खरीद से पहले संबंधित परियोजना, बिल्डर की वैधता, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और भुगतान की प्रक्रिया का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना आवश्यक है। केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर बड़ी रकम का भुगतान करने से बचना चाहिए और प्रत्येक भुगतान का वैध दस्तावेजी रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए। अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
