वॉशिंगटन/ह्यूस्टन: अमेरिका में भारतीय मूल की एक महिला को सोशल मीडिया पर वीजा धोखाधड़ी के झूठे आरोपों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद यह मामला व्यापक विवाद का विषय बन गया। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक भारत-विरोधी अकाउंट ने बिना किसी सार्वजनिक साक्ष्य के महिला पर छात्र वीजा के दुरुपयोग का आरोप लगाया। मामला बढ़ने पर अमेरिकी अटॉर्नी ने हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित महिला अमेरिकी नागरिक हैं और छात्र वीजा पर अमेरिका में नहीं रह रही हैं।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर साधना गोल्लापुडी का ह्यूस्टन स्थित अपने घर के बाहर पारंपरिक भारतीय नृत्य करते हुए एक वीडियो साझा किया गया। पोस्ट में दावा किया गया कि वह वर्ष 2014 से एफ-1 छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रही हैं और विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में दाखिला लेकर लगातार अपने प्रवास को बढ़ाती रही हैं। साथ ही उन पर छात्र वीजा की शर्तों का उल्लंघन करते हुए नृत्य और ट्यूशन के माध्यम से आय अर्जित करने का भी आरोप लगाया गया।
पोस्ट में उन्हें “फॉरएवर स्टूडेंट” बताते हुए कई दावे किए गए, लेकिन इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या सत्यापित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
मामला सामने आने के बाद अमेरिकी अटॉर्नी आरोन राइट्ज़ के कार्यालय ने इसकी जांच की। राइट्ज़ ने सार्वजनिक रूप से कहा कि साधना गोल्लापुडी एक प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्राप्त अमेरिकी नागरिक हैं और छात्र वीजा पर अमेरिका में नहीं रह रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका कार्यालय वीजा धोखाधड़ी के मामलों को गंभीरता से लेता है और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई करता है, लेकिन इस मामले में लगाए गए आरोप सही नहीं पाए गए।
हालांकि, स्पष्टीकरण मिलने के बाद भी आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया अकाउंट ने माफी नहीं मांगी। इसके बजाय उसने दावा किया कि उसके पास अन्य कथित वीजा धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े साक्ष्य हैं, जिन्हें वह संघीय अधिकारियों के साथ साझा कर सकता है।
इस घटना के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय में व्यापक नाराजगी देखने को मिली। समुदाय के कई सदस्यों ने इसे ऑनलाइन उत्पीड़न, नस्लीय पूर्वाग्रह और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं का उदाहरण बताया।
इंडियन अमेरिकन एडवोकेसी काउंसिल के सह-संस्थापक सिद्धार्थ ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग के ऑफिस ऑफ प्रोफेशनल रिस्पॉन्सिबिलिटी में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना था कि सरकारी अधिकारों का उपयोग निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के लिए होना चाहिए, न कि बिना सत्यापन वाले सोशल मीडिया आरोपों को महत्व देने के लिए।
सिद्धार्थ ने कहा कि एक अमेरिकी नागरिक को करोड़ों सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के सामने बिना किसी प्रमाण के वीजा धोखाधड़ी करने वाला बता दिया गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि संघीय अधिकारी की सार्वजनिक प्रतिक्रिया में महिला की नागरिकता की जानकारी साझा करना आवश्यक क्यों था।
मामले पर हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक सुहाग शुक्ला ने भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि एक संघीय अधिकारी ने कथित रूप से नस्लीय घृणा फैलाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया क्यों दी। उन्होंने यह भी मांग की कि झूठे आरोप लगाने और एक अमेरिकी नागरिक को निशाना बनाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, साधना गोल्लापुडी यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट ऑस्टिन में सीनियर ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंट हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल में उन्हें बायोमेडिकल इंजीनियर और प्रशिक्षित कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्यांगना बताया गया है।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए साधना गोल्लापुडी ने कहा कि पिछले कुछ दिन उनके लिए बेहद कठिन और मानसिक रूप से परेशान करने वाले रहे। उन्होंने इंस्टाग्राम पर जारी बयान में कहा कि उनकी अनुमति के बिना उनका वीडियो दोबारा साझा किया गया और उसके साथ उनकी आव्रजन स्थिति को लेकर झूठे एवं भ्रामक दावे किए गए। उन्होंने कहा कि पूरी तरह निराधार आरोपों के कारण उन्हें अनावश्यक ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
इस घटना के बाद अमेरिका में सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत सूचनाओं, नस्लीय प्रोफाइलिंग और भारतीय मूल के लोगों को निशाना बनाए जाने को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सामुदायिक संगठनों ने सोशल मीडिया कंपनियों और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि बिना सत्यापन वाले आरोपों के आधार पर किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से बदनाम होने से बचाने और ऐसे मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
