कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड के तत्कालीन अध्यक्ष और महाप्रबंधक के खिलाफ ₹7.26 करोड़ के कथित गबन का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि दोनों ने वर्ष 2015 से 2018 के बीच मिलीभगत कर संस्था के बैंक खाते से विकास कार्यों के लिए स्वीकृत सरकारी धनराशि का दुरुपयोग किया और नियमों के विपरीत करोड़ों रुपये निकाल लिए। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, संस्था के प्रबंध निदेशक वी. कुमार उर्फ विजय कुमार ने अकबरपुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड एक बहुराज्यीय सहकारी समिति है, जिसे विभिन्न विकास कार्यों के निष्पादन की जिम्मेदारी दी जाती थी। विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के तहत स्वीकृत धनराशि संस्था के बैंक ऑफ बड़ौदा, माती शाखा स्थित खाते में जमा कराई गई थी, ताकि निर्धारित परियोजनाओं पर नियमानुसार खर्च किया जा सके।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उस समय संस्था में प्रशासनिक महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत सुनील कुमार गोयल और तत्कालीन अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार अग्रवाल को निर्माण कार्यों के संचालन, भुगतान और वित्तीय लेनदेन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी अधिकार का दुरुपयोग करते हुए दोनों ने वर्ष 2015 से 2018 के बीच आपसी मिलीभगत से संस्था के खाते से ₹6.32 करोड़ से अधिक की धनराशि अवैध रूप से निकाल ली।
तहरीर के अनुसार, आरोपियों ने इसके अतिरिक्त ₹94.03 लाख का भुगतान भी बिना सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति और निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन किए बिना कर दिया। शिकायत में कहा गया है कि इन निकासियों और भुगतानों से संस्था को कुल ₹7.26 करोड़ का वित्तीय नुकसान हुआ। आरोप है कि धनराशि का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया, जिनके लिए सरकार ने उसे स्वीकृत किया था।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
शिकायत में यह भी कहा गया है कि समय-समय पर शासन स्तर से विकास कार्यों की प्रगति, व्यय विवरण और उपयोगिता प्रमाणपत्र मांगे गए, लेकिन आरोपियों ने कथित रूप से सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। आरोप है कि उन्होंने वास्तविक तथ्यों को छिपाते हुए भ्रामक विवरण प्रस्तुत किए, जिससे वित्तीय अनियमितताओं का समय पर खुलासा नहीं हो सका।
संस्था का कहना है कि जब वित्तीय लेनदेन की समीक्षा की गई तो अनियमितताओं का पता चला। इसके बाद आरोपियों से कई बार स्पष्टीकरण मांगा गया और कथित रूप से निकाली गई धनराशि वापस जमा कराने के लिए नोटिस भी जारी किए गए। हालांकि, शिकायत के अनुसार न तो धनराशि लौटाई गई और न ही संतोषजनक जवाब दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन महाप्रबंधक सुनील कुमार गोयल को सेवा से हटा दिया गया।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात सहित संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच के दौरान बैंक खातों, भुगतान अभिलेखों, प्रशासनिक स्वीकृतियों, निविदा संबंधी दस्तावेजों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि धनराशि किन खातों में स्थानांतरित हुई और उसका वास्तविक उपयोग किस प्रकार किया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है। यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
