NEET पेपर लीक मामले में दिल्ली की फास्ट-ट्रैक अदालत ने 13 आरोपियों के खिलाफ CBI चार्जशीट पर संज्ञान लिया है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी पर CBI का बड़ा एक्शन: ₹1.6 करोड़ साइबर फ्रॉड में चार्जशीट, बैंक अधिकारी समेत दो आरोपी

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By Roopa
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नई दिल्ली/श्रीनगर: ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर दिल्ली के एक वरिष्ठ नागरिक से ₹1.6 करोड़ की साइबर ठगी के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जम्मू-कश्मीर के पुलवामा स्थित एक निजी फर्म के मालिक और एक्सिस बैंक के एक डिप्टी मैनेजर के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी का आरोप है कि निजी फर्म के चालू बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए किया गया, जबकि बैंक अधिकारी ने कथित तौर पर धन के अवैध हस्तांतरण को सुगम बनाने के बदले आर्थिक लाभ हासिल किया।

CBI के अनुसार, यह मामला उस संगठित साइबर ठगी से जुड़ा है जिसमें अपराधियों ने खुद को पुलिस, जांच एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों का प्रतिनिधि बताकर दिल्ली के एक वरिष्ठ नागरिक को वीडियो कॉल के जरिए कथित कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाया। मानसिक दबाव बनाकर पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹1.6 करोड़ ट्रांसफर करा लिए गए।

यह मामला पहले दिल्ली पुलिस के पास दर्ज था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर इसकी जांच CBI को सौंप दी गई। जनवरी 2026 में CBI ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की। जांच के दौरान एजेंसी ने पुलवामा की निजी फर्म से जुड़े आरोपी को गिरफ्तार किया तथा बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की।

जांच एजेंसी का कहना है कि अब तक की जांच में इस साइबर अपराध के पीछे दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय संगठित गिरोह की भूमिका सामने आई है। यह गिरोह भारत में फर्जी कंपनियों, किराए या धोखे से हासिल बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित करता था ताकि धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचना कठिन हो जाए। CBI अभी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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चार्जशीट में आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, चोरी की संपत्ति प्राप्त करने और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कंप्यूटर संसाधनों के जरिए प्रतिरूपण और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े प्रावधान भी लगाए गए हैं। बैंक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत लेने और पद के दुरुपयोग के आरोप भी शामिल किए गए हैं।

CBI का कहना है कि साइबर अपराधों में बैंकिंग और दूरसंचार अवसंरचना का दुरुपयोग करने वाले व्यक्तियों, कंपनियों और अन्य सहयोगियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। एजेंसी के अनुसार, केवल साइबर ठगी करने वाले अपराधी ही नहीं, बल्कि धन के प्रवाह को आसान बनाने वाले बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, फर्जी कंपनियां संचालित करने वाले और अन्य सहयोगी भी कानून के दायरे में लाए जाएंगे।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी व्यवस्था भारत में मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी पुलिस, CBI, ED, आयकर विभाग या अदालत किसी नागरिक को वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं कर सकती। अपराधी लोगों में डर और घबराहट पैदा कर उनसे पैसे ट्रांसफर कराते हैं। ऐसे किसी भी कॉल पर विश्वास करने के बजाय तुरंत कॉल काटकर संबंधित एजेंसी या स्थानीय पुलिस से सत्यापन करना चाहिए।

CBI ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन पर धनराशि स्थानांतरित करने, बैंक खाते की जानकारी देने या गोपनीय वित्तीय विवरण साझा करने का दबाव बनाए, तो किसी भी स्थिति में ऐसा न करें। एजेंसी ने लोगों से संदिग्ध कॉल और साइबर ठगी की घटनाओं की तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है। CBI ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी है और अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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