हैदराबाद: दूरसंचार नेटवर्क का दुरुपयोग कर किए जा रहे साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) और दूरसंचार विभाग (DoT) ने संयुक्त रणनीति तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को आयोजित उच्चस्तरीय समन्वय बैठक में SIM फ्रॉड, स्पूफ्ड कॉल, फिशिंग हमलों, VoIP आधारित धोखाधड़ी और अवैध SIM बॉक्स नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज करने पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे दूरसंचार ढांचे के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और केंद्रीय संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया।
बैठक की अध्यक्षता तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो की निदेशक शिखा गोयल ने की। इसमें दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), विभिन्न टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं तथा TGCSB के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधों में इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल कनेक्शन, फर्जी पहचान, स्पूफिंग तकनीक और अवैध दूरसंचार उपकरणों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करना था।
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा SIM बॉक्स और अन्य अवैध दूरसंचार उपकरणों के दुरुपयोग का रहा। अधिकारियों ने माना कि साइबर अपराधी इन तकनीकों का उपयोग कर विदेशी कॉल को स्थानीय नंबर के रूप में प्रदर्शित करते हैं, जिससे पीड़ितों को धोखा देना आसान हो जाता है। ऐसे मामलों की तेजी से पहचान कर कार्रवाई करने के लिए तकनीकी और परिचालन स्तर पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
इसके अलावा साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान और सत्यापन प्रक्रिया को अधिक तेज और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि शिकायत मिलने और संदिग्ध नंबर पर कार्रवाई के बीच लगने वाला समय कम करना आवश्यक है, ताकि अपराधियों द्वारा मोबाइल नंबर बदलकर बच निकलने की संभावना घटाई जा सके।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
बैठक में SIM जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाने पर भी जोर दिया गया। ग्राहक सत्यापन (KYC) को मजबूत करने, एक व्यक्ति के नाम पर असामान्य संख्या में जारी किए गए SIM कार्डों की निगरानी तथा विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों के बीच सूचना साझा करने की प्रणाली को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। अधिकारियों का मानना है कि इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर SIM लेने वाले गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
Point of Sale (PoS) केंद्रों की निगरानी भी बैठक का महत्वपूर्ण विषय रही। अधिकारियों ने ऐसे बिक्री केंद्रों की पहचान करने पर विचार किया, जहां असामान्य संख्या में SIM जारी किए जा रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे मामलों की जांच कर फर्जी पंजीकरण और अवैध SIM वितरण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए संदिग्ध मोबाइल नंबरों के संबंध में समय पर चेतावनी जारी करने, साइबर अपराध में प्रयुक्त मोबाइल कनेक्शनों को शीघ्र निष्क्रिय करने तथा फिशिंग वेबसाइटों, दुर्भावनापूर्ण URL और फर्जी लिंक को तेजी से ब्लॉक करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्पूफ्ड कॉल, VoIP आधारित धोखाधड़ी और टेलीकॉम पहचान छिपाने (Identity Masking) जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने पर भी सहमति बनी।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आज अधिकांश संगठित साइबर अपराधों की शुरुआत फर्जी SIM, स्पूफ्ड कॉल या फिशिंग लिंक से होती है। उनके अनुसार यदि दूरसंचार विभाग, I4C, टेलीकॉम कंपनियां और कानून प्रवर्तन एजेंसियां रीयल-टाइम सूचना साझा करें और संदिग्ध मोबाइल नंबरों पर तत्काल कार्रवाई करें, तो डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी, OTP फ्रॉड और बैंकिंग ठगी जैसे मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
बैठक में इस बात पर भी बल दिया गया कि दूरसंचार विभाग, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, टेलीकॉम कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखना आवश्यक है। अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी सहयोग, डेटा साझा करने की बेहतर व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से साइबर अपराधों की जांच अधिक प्रभावी होगी तथा नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बेहतर सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी।
