फर्जी कंपनियों, बैंक खातों और कागजी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का कथित दुरुपयोग; कई बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और फर्जी फर्मों की मुहरें बरामद, अन्य आरोपियों की तलाश जारी

₹5 करोड़ से अधिक के कथित जीएसटी फर्जीवाड़े का खुलासा, फर्जी फर्में बनाकर टैक्स क्रेडिट हड़पने के आरोप में दो गिरफ्तार

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By Roopa
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बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में फर्जी फर्मों और बैंक खातों के माध्यम से ₹5 करोड़ से अधिक के कथित जीएसटी फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों पर कागजी कंपनियां बनाकर फर्जी खरीद-बिक्री दर्शाने, फर्जी बिल और वाउचर तैयार करने तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का कथित रूप से अवैध लाभ लेने का आरोप है। मामले में कैंट, इज्जतनगर और भमोरा थानों में पहले से दर्ज तीन अलग-अलग मुकदमों के आधार पर संयुक्त कार्रवाई की गई। पुलिस अब पूरे वित्तीय नेटवर्क, फर्जी कंपनियों और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार वर्ष 2024 और 2025 के दौरान सामने आए जीएसटी धोखाधड़ी के मामलों में विस्तृत जांच के बाद वांछित आरोपियों की तलाश की जा रही थी। इसी क्रम में गठित विशेष टीम ने मनु इंटरनेशनल स्कूल तिराहे के पास स्थित नायरा पेट्रोल पंप क्षेत्र से संभल के बहजोई निवासी राहुल गुप्ता और मीरगंज निवासी गोविंद गुप्ता को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी तीनों मामलों में वांछित बताए जा रहे थे और उनके खिलाफ पहले से दर्ज मुकदमों में पूछताछ की जा रही है।

प्रारंभिक जांच में पुलिस का आरोप है कि गिरोह ने कई फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराया और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए। इसके बाद कागजी लेनदेन, फर्जी बिल, नकली खरीद-बिक्री और दस्तावेजों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। फिलहाल वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज और जीएसटी रिटर्न का मिलान कर पूरे लेनदेन की जांच की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार अमित गुप्ता और प्रशांत गुप्ता नामक व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उनके नाम पर या उनके सहयोग से अन्य फर्जी कंपनियां संचालित की जा रही थीं या नहीं। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया जा सकता है।

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कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री भी बरामद की है। इनमें एक रेनॉल्ट डस्टर कार, नौ मोबाइल फोन, 37 एटीएम एवं डेबिट कार्ड, 12 पैन कार्ड, 21 आधार एवं अन्य पहचान पत्र, 36 चेकबुक, 17 बैंक पासबुक, पांच हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक, छह फर्जी फर्मों की मुहरें, आठ यूपीआई क्यूआर स्कैनर, दो रजिस्टर, तीन डायरी, दो भरी हुई तथा 20 खाली बिलबुक के अलावा विभिन्न कंपनियों से जुड़े जीएसटी और बैंकिंग दस्तावेज शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि बरामद सामग्री पूरे नेटवर्क के संचालन और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को समझने में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है।

पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान विवरण, जीएसटी पोर्टल पर दर्ज जानकारी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का फोरेंसिक विश्लेषण करा रही है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित फर्जी कंपनियों के माध्यम से कितनी राशि का लेनदेन किया गया और इस नेटवर्क से अन्य राज्यों या व्यक्तियों का कोई संबंध था या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों में धन के प्रवाह और लाभार्थियों की पहचान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार जीएसटी फर्जीवाड़े में फर्जी कंपनियों और कागजी लेनदेन का उपयोग कर कर चोरी तथा अवैध वित्तीय लाभ प्राप्त करने के प्रयास गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में आते हैं। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध दस्तावेजी, वित्तीय तथा डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों, कंपनियों या सहयोगियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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