आउटसोर्सिंग के जरिए सफाई कर्मियों की नियुक्ति में प्रति अभ्यर्थी रिश्वत मांगने का आरोप; ट्रैप के दौरान ₹60 हजार बरामद, नकदी, अभ्यर्थियों की सूची और अन्य दस्तावेज भी जांच के दायरे में

छावनी बोर्ड में भर्ती के नाम पर ₹60 हजार रिश्वत लेते सहायक सफाई निरीक्षक गिरफ्तार, सीबीआई ने ट्रैप कार्रवाई में दबोचा

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By Roopa
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अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या छावनी बोर्ड में सफाई कर्मियों की भर्ती के नाम पर कथित रिश्वतखोरी के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने सहायक सफाई निरीक्षक जितेंद्र सिंह को ₹60,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार आरोपी पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों के बदले अभ्यर्थियों से धन की मांग करने का आरोप है। सीबीआई ने ट्रैप कार्रवाई के दौरान आरोपी को तय स्थान से गिरफ्तार कर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। अब जांच एजेंसी नियुक्ति प्रक्रिया, बरामद दस्तावेजों, नकदी और संभावित अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

सीबीआई के अनुसार कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद की गई। शिकायतकर्ता विनीश कुमार, जो लालकुर्ती क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं, ने आरोप लगाया था कि अयोध्या छावनी बोर्ड में सफाई कर्मियों की भर्ती के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत में कहा गया कि सहायक सफाई निरीक्षक जितेंद्र सिंह नियुक्ति सुनिश्चित कराने के बदले अभ्यर्थियों से धन की मांग कर रहा है। प्रारंभिक गोपनीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद 30 जुलाई 2026 को सीबीआई, लखनऊ को औपचारिक शिकायत भेजी गई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर ट्रैप की योजना बनाई गई।

जांच एजेंसी के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि मामला छावनी बोर्ड में आउटसोर्सिंग के माध्यम से लगभग 280 सफाई कर्मियों की प्रस्तावित नियुक्ति से जुड़ा हो सकता है। आरोप है कि आरोपी प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹20,000 रिश्वत की मांग कर रहा था। शिकायत के अनुसार पांच अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए कुल ₹1 लाख की कथित रिश्वत तय हुई थी, जिसमें पहले चरण में ₹60,000 और शेष ₹40,000 बाद में देने की सहमति बनी थी। पुलिस का कहना है कि नियुक्तियां कथित तौर पर ठेकेदार के माध्यम से कराए जाने की बात कही गई थी।

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शिकायत मिलने के बाद सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने विधिवत ट्रैप की तैयारी की। जांच टीम ने शिकायतकर्ता को रासायनिक पाउडर लगे नोट उपलब्ध कराए और पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। अधिकारियों के अनुसार जैसे ही आरोपी ने तय स्थान पर शिकायतकर्ता से ₹60,000 की राशि स्वीकार की, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। परीक्षण के दौरान आरोपी के हाथों पर लगाए गए रासायनिक अभिकर्मक की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक पाई गई, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।

सूत्रों के अनुसार ट्रैप कार्रवाई के बाद आरोपी की तलाशी के दौरान रिश्वत की कथित राशि के अतिरिक्त उसकी मोटरसाइकिल से लगभग ₹50,000 नकद और करीब 280 अभ्यर्थियों की एक सूची भी बरामद हुई। इसके अलावा उसकी शर्ट की जेब से ₹25,000 नकद मिलने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में अतिरिक्त नकदी का उल्लेख नहीं किया गया है। जांच एजेंसी अब बरामद नकदी, सूची और अन्य दस्तावेजों की वैधानिक जांच कर रही है ताकि उनकी प्रासंगिकता और स्रोत का पता लगाया जा सके।

सीबीआई अब यह भी जांच कर रही है कि कथित रिश्वतखोरी किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा थी या नहीं। इसके लिए भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड, अभ्यर्थियों की सूची, ठेकेदारों की भूमिका, वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। यदि जांच में अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों या बिचौलियों की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उन्हें भी जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा।

जांच एजेंसी ने कहा कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों को गंभीरता से लिया जाता है। मामले की जांच जारी है और उपलब्ध वित्तीय, डिजिटल तथा दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य या अन्य लाभार्थियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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