प्रयागराज से शुरू हुई कार्रवाई में मुख्य आरोपी समेत कई लोगों से पूछताछ; अधिकृत ऑपरेटर आईडी के कथित दुरुपयोग, रिमोट एक्सेस, व्हाट्सएप चैट और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर जांच आगे बढ़ी

AnyDesk के जरिए आधार अपडेट में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा: एटीएस ने गिरोह का भंडाफोड़ किया, कई जिलों तक फैले नेटवर्क की जांच तेज

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By Roopa
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प्रयागराज: उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने AnyDesk जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर का कथित दुरुपयोग कर आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने वाले एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। मामले में प्रयागराज के धूमनगंज क्षेत्र निवासी विवेक त्रिपाठी को गिरफ्तार कर साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान प्रतापगढ़ जिले के हीरागंज बाजार स्थित एक जनसेवा केंद्र (सीएससी) पर भी छापेमारी की गई, जहां संचालक लवकुश और उसके भाई लवलेश को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। बाद में लवलेश को छोड़ दिया गया, जबकि लवकुश को आगे की पूछताछ के लिए प्रयागराज लाया गया। जांच एजेंसियां अब इस कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और इसके विस्तार की पड़ताल कर रही हैं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी अधिकृत आधार ऑपरेटरों की निष्क्रिय या बंद हो चुकी यूजर आईडी का कथित रूप से दुरुपयोग कर आधार नामांकन और अपडेट सेवाओं तक अनधिकृत पहुंच बना रहे थे। एटीएस का आरोप है कि इसके लिए AnyDesk के माध्यम से संबंधित कंप्यूटरों का रिमोट एक्सेस लिया जाता था और तकनीकी तरीकों से यूआईडीएआई प्रणाली में लॉगिन कर आधार से जुड़े कार्य किए जाते थे। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि इस प्रक्रिया के दौरान कितने आधार रिकॉर्ड प्रभावित हुए और क्या किसी नागरिक के डेटा का दुरुपयोग हुआ।

पूछताछ में विवेक त्रिपाठी ने कथित रूप से बताया कि वह पहले एक निजी कंपनी में असिस्टेंट रीजनल प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत था। उसके अनुसार, विभिन्न बैंकों के अनुबंध समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में आधार ऑपरेटरों की आईडी निष्क्रिय हो गई थीं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसी दौरान उसकी मुलाकात एक ऐसे तकनीकी व्यक्ति से हुई जिसने क्लोनिंग और बाईपास तकनीक के जरिए आधार सेवाओं को दोबारा सक्रिय कराने का दावा किया। इसके बाद कथित रूप से पुराने ऑपरेटरों को जोड़कर एक समानांतर नेटवर्क तैयार किया गया, जिसके माध्यम से आधार अपडेट का कार्य किया जाने लगा।

एटीएस के अनुसार, इस कथित नेटवर्क में प्रत्येक यूजर आईडी सक्रिय करने के बदले लगभग ₹5,000 लिए जाते थे। इसके अलावा प्रत्येक आधार अपडेट के लिए लगभग ₹150 शुल्क वसूला जाता था। जांच में सामने आया है कि भुगतान यूपीआई और क्यूआर कोड के माध्यम से प्राप्त किए जाते थे। एजेंसी अब बैंक खातों, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से कुल कितनी राशि का लेनदेन हुआ और उससे किसे लाभ पहुंचा।

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जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से कई महीनों की व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। एटीएस के अनुसार, इन चैट में ऑपरेटरों की AnyDesk आईडी, लॉगिन का समय, भुगतान के स्क्रीनशॉट और कथित रूप से अस्वीकृत आधार नामांकन को दोबारा स्वीकृत कराने संबंधी बातचीत शामिल है। इसके अतिरिक्त एक एक्सेल शीट भी मिली है, जिसमें ऑपरेटरों के नाम, सिस्टम आईडी, AnyDesk विवरण तथा किए गए आधार अपडेट का रिकॉर्ड दर्ज होने का दावा किया गया है। एजेंसी इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच करा रही है।

प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि कथित नेटवर्क केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं था। एटीएस को आशंका है कि चित्रकूट, अयोध्या, वाराणसी मंडल, सुल्तानपुर सहित कई जिलों के आधार ऑपरेटर इस नेटवर्क के संपर्क में रहे हो सकते हैं। अब संबंधित जिलों के रिकॉर्ड, ऑपरेटर लॉग, डिजिटल गतिविधियों और यूआईडीएआई से जुड़े अभिलेखों का मिलान किया जा रहा है ताकि नेटवर्क के वास्तविक दायरे का पता लगाया जा सके। यदि अन्य राज्यों या जिलों तक इसके संबंध सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन स्वयं वैध तकनीकी उपकरण हैं, लेकिन उनका अनधिकृत उपयोग गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे आधार अपडेट केवल अधिकृत केंद्रों पर ही कराएं, किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने कंप्यूटर या मोबाइल का रिमोट एक्सेस न दें तथा आधार नंबर, ओटीपी और बायोमैट्रिक जानकारी साझा करने से बचें। साथ ही समय-समय पर आधार उपयोग का इतिहास जांचते रहें ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सके। फिलहाल एटीएस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।

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