गुरुग्राम: विदेश भेजने और स्लोवाकिया का वीजा दिलाने का झांसा देकर ₹6 लाख की कथित ठगी करने के मामले में गुरुग्राम पुलिस ने दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज, वीडियो कॉल और नकली वीजा दिखाकर शिकायतकर्ता को विश्वास में लिया तथा कई चरणों में लाखों रुपये वसूल लिए। मामले में पहले एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिससे ₹2 लाख की बरामदगी भी हुई थी। पुलिस अब गिरफ्तार दूसरे आरोपी से पूछताछ कर पूरे गिरोह, धन के प्रवाह और संभावित अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटाने में लगी है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी की पहचान 39 वर्षीय दीपक कुमार के रूप में की है, जो हरियाणा के रेवाड़ी जिले के रतनथल गांव का निवासी है। जांच एजेंसी के अनुसार, उसने अपने साथी शैलेष के साथ मिलकर विदेश में नौकरी और वीजा उपलब्ध कराने के नाम पर कथित धोखाधड़ी को अंजाम दिया। शैलेष को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। वर्तमान में दीपक को पुलिस रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके कार्य करने के तरीके का पता लगाया जा सके।
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यह मामला गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-29 थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। शिकायत रेवाड़ी निवासी एक व्यक्ति ने दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी और उसके सहयोगियों ने उसे स्लोवाकिया भेजने का प्रस्ताव दिया और दावा किया कि वे वैध प्रक्रिया के तहत वीजा और विदेश में रोजगार की व्यवस्था करा सकते हैं। शुरुआत में आरोपियों ने प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर ₹50,000 लिए और भरोसा दिलाया कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जल्द ही विदेश भेज दिया जाएगा।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और वीडियो कॉल के माध्यम से शिकायतकर्ता को कथित वीजा दिखाया। इन दस्तावेजों और डिजिटल माध्यम से किए गए संचार के आधार पर शिकायतकर्ता का विश्वास और मजबूत किया गया। आरोप है कि इसी दौरान विभिन्न बहानों से उससे कुल लगभग ₹6 लाख की राशि वसूल ली गई। भुगतान प्राप्त करने के बाद भी न तो विदेश भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई और न ही कोई वैध यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराया गया।
जब लंबे समय तक विदेश भेजने का वादा पूरा नहीं हुआ और आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे, तब शिकायतकर्ता को अपने साथ हुई कथित ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने डीएलएफ फेज-29 थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी एवं वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पहले शैलेष और अब दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने फर्जी वीजा और दस्तावेज तैयार करने के लिए किन संसाधनों का इस्तेमाल किया। साथ ही बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल संचार, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ठगी की रकम किन खातों में गई और क्या इस गिरोह ने अन्य लोगों को भी इसी तरह विदेश भेजने के नाम पर निशाना बनाया है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह का संबंध किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से तो नहीं है, जो विदेश में नौकरी और वीजा दिलाने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करता हो। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और संभावित ठिकानों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। जांच पूरी होने के बाद मामले में अतिरिक्त धाराएं या अन्य आरोपियों को भी शामिल किया जा सकता है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि विदेश भेजने और नौकरी दिलाने के नाम पर सक्रिय ठग अब फर्जी वीजा, नकली ऑफर लेटर, वीडियो कॉल और डिजिटल दस्तावेजों का उपयोग कर लोगों का विश्वास जीतते हैं। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में डिजिटल फॉरेंसिक, बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, इलेक्ट्रॉनिक संचार और वित्तीय लेनदेन का वैज्ञानिक विश्लेषण पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी विदेश रोजगार या वीजा प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले संबंधित एजेंसी की वैधता, लाइसेंस और दस्तावेजों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करें तथा बिना पुष्टि के किसी भी खाते में धनराशि हस्तांतरित न करें। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
