कल्याण (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के कल्याण में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ₹11 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि सेना से सेवानिवृत्त एक अधिकारी और उसके सहयोगी ने आयकर विभाग तथा बाद में स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर एक आरटीओ एजेंट से चरणबद्ध तरीके से रकम वसूली। पीड़ित की शिकायत पर महात्मा फुले पुलिस थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायत के अनुसार, उल्हासनगर निवासी और कल्याण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) परिसर में एजेंट के रूप में काम करने वाले यूसुफ लोटन पिंजारी अपने स्नातक पुत्र के लिए नौकरी की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान उनके रिश्तेदार ने बताया कि नासिक निवासी सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी भरत अशोक देवरे कई युवाओं को सरकारी नौकरियां दिलवा चुके हैं। इस जानकारी के आधार पर पिंजारी ने देवरे से संपर्क किया।
आरोप है कि देवरे ने दावा किया कि आयकर विभाग में वर्ष 2023 की प्रतीक्षा सूची के आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं और वह प्रभाव का इस्तेमाल कर पिंजारी के बेटे की नियुक्ति करवा सकते हैं। इसके लिए पहले अग्रिम राशि देने की बात कही गई। मुलाकात के लिए देवरे कल्याण पहुंचे, जहां उन्होंने नौकरी सुनिश्चित कराने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया पर ₹16 लाख खर्च होंगे और शुरुआती किस्त के रूप में ₹5 लाख देने होंगे।
शिकायत में कहा गया है कि बातचीत के दौरान आरोपियों ने यह भी दावा किया कि नियुक्ति की संभावना 99 प्रतिशत है। इस भरोसे के बाद पिंजारी ने अलग-अलग चरणों में उन्हें ₹4 लाख सौंप दिए। इसके बाद शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच पूरी होने और प्रक्रिया आगे बढ़ने का हवाला देते हुए अतिरिक्त रकम की मांग की गई।
बाद में पिंजारी को शेष ₹5 लाख लेकर औरंगाबाद बुलाया गया। वहां एक होटल में उनकी मुलाकात बबन भाऊसाहेब गायकवाड़ और एक अन्य व्यक्ति से कराई गई, जिसे आयकर विभाग का कर्मचारी बताया गया। शिकायत के मुताबिक, होटल में ही पिंजारी के बेटे का कथित इंटरव्यू लिया गया, आवश्यक दस्तावेज जमा कराए गए और सरकारी मेडिकल परीक्षण के नाम पर एक पत्र भी सौंपा गया। इसी दौरान ₹5 लाख और ले लिए गए।
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हालांकि, इसके बाद भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया। जब पीड़ित ने बार-बार संपर्क किया तो आरोपियों ने नया दावा किया कि आयकर विभाग में नियुक्ति संभव नहीं हो सकी, लेकिन अब नासिक स्वास्थ्य सेवा विभाग में नौकरी दिलाई जाएगी। इसके समर्थन में एक कथित प्रतीक्षा सूची भेजी गई, जिसमें पिंजारी के बेटे का नाम 65वें क्रम पर दिखाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह सूची भी फर्जी थी और केवल भरोसा बनाए रखने के लिए भेजी गई थी।
समय बीतने के बावजूद न तो आयकर विभाग में नौकरी मिली और न ही स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति हुई। लगातार टालमटोल और आश्वासनों के बाद पिंजारी को अपने साथ धोखाधड़ी होने का संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने पूरे घटनाक्रम की शिकायत पुलिस से की।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी भरत अशोक देवरे और उनके सहयोगी बबन भाऊसाहेब गायकवाड़ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मामले में धन के लेनदेन, कथित फर्जी दस्तावेज, इंटरव्यू की व्यवस्था और नौकरी दिलाने के नाम पर किए गए दावों की जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या आरोपियों ने इसी तरह अन्य लोगों को भी सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगा है। जांच के दौरान बैंक लेनदेन, दस्तावेजों की सत्यता और कथित नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति को बिना आधिकारिक सत्यापन के बड़ी रकम न दें और ऐसे प्रस्ताव मिलने पर संबंधित विभाग या पुलिस से पुष्टि अवश्य करें।
