नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से जुड़े कथित AI-जनित डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद केंद्र सरकार ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक इकाई ने इन वीडियो को फर्जी और भ्रामक करार देते हुए कहा कि इन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किया गया है ताकि जनता के बीच गलत सूचना फैलाई जा सके। इस बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपने कथित डीपफेक वीडियो के संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर चाणक्यपुरी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
PIB के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के वास्तविक वीडियो फुटेज के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ कर नए ऑडियो और संवाद जोड़े गए। फैक्ट चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं ने वायरल वीडियो में दिखाई गईं कथित टिप्पणियां कभी नहीं कीं और इन क्लिप्स का उद्देश्य लोगों को भ्रमित करना है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इन वीडियो को कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सुनियोजित तरीके से व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि वीडियो सबसे पहले किसने तैयार किया, किन डिजिटल माध्यमों से इसे फैलाया गया और इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि संसद परिसर के बाहर मीडिया से हुई उनकी वास्तविक बातचीत को AI तकनीक के माध्यम से संपादित कर भ्रामक रूप दिया गया। उन्होंने बताया कि मामले में पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई है और एफआईआर संख्या 123/26 के तहत जांच शुरू हो चुकी है। मंत्री ने कहा कि फर्जी वीडियो बनाने, साझा करने या उसे बढ़ावा देने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वायरल वीडियो को लेकर विवाद उस समय बढ़ा जब उसमें कथित तौर पर NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन के संदर्भ में नेताओं की टिप्पणियां दिखाई गईं। हालांकि PIB ने स्पष्ट किया कि वीडियो में प्रयुक्त ऑडियो और कथित बयान वास्तविक नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार वास्तविक वीडियो में केवल सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया से हुई बातचीत के दृश्य थे, जिनमें बाद में डिजिटल छेड़छाड़ की गई।
PIB ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी वायरल वीडियो, ऑडियो या संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें। फैक्ट चेक इकाई ने लोगों से कहा है कि यदि उन्हें किसी सरकारी नीति, मंत्री या प्रधानमंत्री से जुड़ी संदिग्ध सामग्री दिखाई दे तो उसकी सूचना PIB Fact Check को भेजें, ताकि समय रहते उसका सत्यापन किया जा सके और गलत सूचना के प्रसार को रोका जा सके।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि AI आधारित डीपफेक तकनीक लगातार अधिक उन्नत होती जा रही है, जिससे सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए असली और नकली वीडियो में अंतर करना कठिन हो सकता है। ऐसे मामलों में डिजिटल फोरेंसिक, मेटाडेटा विश्लेषण, ऑडियो पैटर्न परीक्षण और स्रोत सत्यापन जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण उपकरण बन चुके हैं।
Algoritha Security के एक Researcher के अनुसार, आधुनिक डीपफेक अभियानों में AI आधारित वीडियो और ऑडियो संशोधन के साथ समन्वित सोशल मीडिया प्रसार रणनीति का उपयोग किया जाता है ताकि कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक भ्रामक सामग्री पहुंचाई जा सके। शोधकर्ता ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डीपफेक पहचान प्रणाली, डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण, व्यवहारिक पैटर्न मॉनिटरिंग और प्लेटफॉर्म-स्तरीय सत्यापन तंत्र ऐसे अभियानों की शीघ्र पहचान और रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी समाधान, त्वरित कानूनी कार्रवाई और नागरिकों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाकर ही AI आधारित दुष्प्रचार अभियानों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।
