ऑपरेशन 'तूफान' के दौरान पुलिस को कॉल सेंटर से संचालित कथित ऑनलाइन लोन ऐप गिरोह का मिला सुराग; विदेशी नागरिकों समेत बड़ी संख्या में लोगों को बनाया गया निशाना, डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी

सेना के प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थान से ₹8.39 लाख की छह चांदी की ट्रॉफियां चोरी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटी सेना

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: भारतीय सेना के प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल ट्रेनिंग (AIPT) से लगभग ₹8.39 लाख मूल्य की छह चांदी की ट्रॉफियां चोरी होने के मामले के बाद सेना ने पूरे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, चोरी की घटना के बाद गठित आंतरिक कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (Court of Inquiry) ने सुरक्षा व्यवस्था में कई कमियां चिन्हित की हैं, जिसके आधार पर सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और प्रवेश नियंत्रण प्रणाली को सख्त बनाने जैसे सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, चोरी की यह घटना 13 फरवरी से 15 मार्च 2026 के बीच हुई होने की आशंका है, लेकिन इसका पता मार्च के अंतिम सप्ताह में उस समय चला जब अधिकारियों के मेस की सफाई के दौरान ट्रॉफियों की प्रदर्शनी अलमारी खोली गई। जांच में सामने आया कि वहां रखी छह चांदी की ट्रॉफियां गायब थीं, जिनमें कई दुर्लभ और ऐतिहासिक महत्व वाली पुरानी ट्रॉफियां भी शामिल थीं।

घटना सामने आने के बाद सेना ने आंतरिक जांच शुरू की और 4 अप्रैल को पुणे के वानोवरी पुलिस थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई गई। मामले की जांच पुलिस और सेना दोनों स्तरों पर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि चोरी केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि इन ट्रॉफियों का सैन्य इतिहास और संस्थान की विरासत से भी विशेष संबंध है।

कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान परिसर के कुछ हिस्सों में निगरानी संबंधी कमियां सामने आईं। इसके बाद सेना ने पूरे परिसर में अधिक से अधिक क्षेत्रों को कवर करने के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया है। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाई जा रही है और गश्त की व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, घटनास्थल पर जबरन प्रवेश के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसी आधार पर आशंका जताई जा रही है कि चोरी को अंजाम देने वाला व्यक्ति परिसर और उसकी व्यवस्था से भली-भांति परिचित हो सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए जांच का दायरा उन लोगों तक भी बढ़ाया गया है, जिन्हें संस्थान के विभिन्न हिस्सों तक नियमित पहुंच प्राप्त थी।

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सेना ने संविदा कर्मचारियों और नागरिक कर्मियों की नियुक्ति एवं तैनाती से जुड़ी प्रक्रियाओं की भी समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और प्रवेश अनुमति प्रणाली को और सख्त बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

दूसरी ओर, वानोवरी पुलिस ने मामले की जांच के तहत मेस में कार्यरत नागरिक कर्मचारियों के फिंगरप्रिंट एकत्र किए हैं और उन्हें फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा गया है। हालांकि, फोरेंसिक रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि घटना सेना के सुरक्षित परिसर के भीतर हुई है, जहां तकनीकी साक्ष्य सीमित हैं, जिससे जांच अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण हो गई है।

जांचकर्ताओं ने पुणे शहर के सर्राफा कारोबारियों और चांदी के व्यापारियों को भी सतर्क किया है। पुलिस ने उन्हें चोरी हुई ट्रॉफियों का विवरण उपलब्ध कराते हुए निर्देश दिया है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी ट्रॉफियों को बेचने या पिघलाने का प्रयास करे तो इसकी तत्काल सूचना पुलिस को दी जाए। इससे चोरी गई धरोहरों की बरामदगी की संभावना बढ़ सकती है।

फिलहाल मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और जांच जारी है। पुलिस फोरेंसिक रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों, कर्मचारियों से पूछताछ और अन्य तकनीकी जानकारियों के आधार पर चोरी की पूरी साजिश का पता लगाने का प्रयास कर रही है। वहीं सेना का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाए गए सभी उपाय चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और संस्थान की ऐतिहासिक धरोहरों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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