नोएडा में STF की कार्रवाई में फर्जी आधार कार्ड, बैंक दस्तावेज, पासपोर्ट और कंपनी रिकॉर्ड बरामद; शेल कंपनियों, हांगकांग कनेक्शन और करोड़ों रुपये के लेनदेन की जांच तेज

₹100 करोड़ जॉब स्कैम का खुलासा: गेस्ट हाउस में चल रही थी ‘ठगी की पाठशाला’, 60,000 से अधिक युवाओं को निशाना बनाने का आरोप

Roopa
By Roopa
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कानपुर (उत्तर प्रदेश): कानपुर पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर ₹80 से ₹100 करोड़ की ठगी करने वाले एक बड़े मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड चेन नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के अनुसार हनुमंत विहार क्षेत्र स्थित एक गेस्ट हाउस में बेरोजगार युवाओं को कथित ठगी के तरीके सिखाए जा रहे थे। संयुक्त कार्रवाई के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि झारखंड, बिहार और मध्य प्रदेश से आए 200 से अधिक युवाओं को वहां से बाहर निकालकर उनके बयान दर्ज किए गए। प्रारंभिक जांच में पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क ने देशभर में 60,000 से अधिक युवाओं को निशाना बनाकर ₹80 से ₹100 करोड़ तक की ठगी की है।

पुलिस के अनुसार गेस्ट हाउस में पिछले कई दिनों से प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा था, जहां युवाओं को चेन सिस्टम के माध्यम से नए लोगों को जोड़ने और उनसे पैसे वसूलने की रणनीति सिखाई जा रही थी। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि अधिकांश युवक रोजगार की तलाश में विभिन्न राज्यों से कानपुर पहुंचे थे और उन्हें स्थायी नौकरी तथा आकर्षक वेतन का झांसा दिया गया था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब बिहार के तीन युवकों ने पुलिस से शिकायत की कि वे करीब तीन महीने से कंपनी के लिए काम कर रहे थे, लेकिन उन्हें न तो वेतन मिला और न ही किसी प्रकार का कमीशन। उन्होंने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि घर लौटने और भोजन तक के लिए पैसे नहीं बचे थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने गेस्ट हाउस पर छापा मारा और कथित प्रशिक्षण गतिविधियों का खुलासा हुआ।

पुलिस का आरोप है कि गिरोह Win Maker Ayurveda Private Limited और Dhanvantari Ayurveda के नाम से मल्टी-लेवल मार्केटिंग फ्रेंचाइजी संचालित कर युवाओं को प्रति माह ₹25,000 से ₹30,000 वेतन वाली नौकरी का लालच देता था। चयन प्रक्रिया को विश्वसनीय दिखाने के लिए कॉरपोरेट शैली में इंटरव्यू आयोजित किए जाते थे। इसके बाद अभ्यर्थियों से रजिस्ट्रेशन और प्रशिक्षण शुल्क के नाम पर ₹15,000 से ₹30,000 तक वसूले जाते थे। बदले में उन्हें कम मूल्य की किट, जिसमें साबुन, तेल, कपड़े और कुछ आयुर्वेदिक उत्पाद शामिल होते थे, सौंप दी जाती थी।

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जांच के अनुसार युवाओं पर कम से कम दो नए सदस्यों को नेटवर्क से जोड़ने का दबाव बनाया जाता था। उन्हें बताया जाता था कि जितने अधिक सदस्य जुड़ेंगे, उतना अधिक कमीशन और पदोन्नति मिलेगी। गिरोह ने कथित तौर पर सिल्वर, गोल्ड, प्लेटिनम सहित 16 अलग-अलग पद निर्धारित कर रखे थे और दावा किया जाता था कि इन पदों पर पहुंचने पर ₹25,000 से ₹5 लाख प्रति माह तक की आय संभव है। पुलिस का कहना है कि इस मॉडल का उद्देश्य नए सदस्यों से धन जुटाना था, न कि वास्तविक रोजगार उपलब्ध कराना।

कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रविंद्र यादव, कमलेश कुमार, रोहित शॉ, मंगल शाक्य, राजू कुमार और मंतोष पासवान के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके कब्जे से छह मोबाइल फोन, कॉरपोरेट दस्तावेज, डिजिटल चैट, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं। इन डिजिटल रिकॉर्ड्स की फोरेंसिक जांच कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस के अनुसार गिरोह के 100 से अधिक प्रशिक्षण केंद्र विभिन्न राज्यों में संचालित होने की आशंका है, जिनमें उत्तर प्रदेश के कम से कम पांच केंद्र शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में दिल्ली और नोएडा स्थित केंद्रों की भी भूमिका सामने आई है। पूरे नेटवर्क की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो कथित सरगनाओं, वित्तीय प्रवाह, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रहा है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, पिरामिड और फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग योजनाएं अक्सर रोजगार और वित्तीय स्वतंत्रता का सपना दिखाकर युवाओं को जाल में फंसाती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था में शामिल होने से पहले उसकी वैधता, कंपनी का पंजीकरण, वास्तविक व्यापार मॉडल और नियामकीय अनुपालन की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए। केवल भर्ती के बदले धन कमाने का दावा करने वाली योजनाओं से विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है।

पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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