नई दिल्ली: गूगल की मूल कंपनी Alphabet Inc. कथित प्रतिभूति (Securities) कानून उल्लंघन के आरोपों को लेकर जांच के दायरे में आ गई है। अमेरिकी कानून फर्म Law Offices of Howard G. Smith ने घोषणा की है कि वह यह जांच कर रही है कि क्या कंपनी ने निवेशकों को ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान हुआ। यह कदम उस मीडिया रिपोर्ट के बाद उठाया गया, जिसमें दावा किया गया कि गूगल का उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल Gemini 3.5 Pro तकनीकी समस्याओं के कारण निर्धारित समय से कई महीने पीछे चल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, Gemini 3.5 Pro के विकास के दौरान कोडिंग संबंधी चुनौतियां और अपेक्षा से कमजोर प्रशिक्षण परिणाम सामने आए। इन खबरों के सार्वजनिक होने के बाद 16 जुलाई 2026 को Alphabet के शेयरों में लगभग 4.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कंपनी के बाजार मूल्य में उल्लेखनीय कमी आई और निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा।
Law Offices of Howard G. Smith का कहना है कि वह यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या Alphabet ने अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों का उल्लंघन किया या निवेशकों को ऐसी जानकारी से वंचित रखा, जो उनके निवेश संबंधी निर्णयों को प्रभावित कर सकती थी। कानून फर्म ने उन निवेशकों से संपर्क करने की अपील की है, जिन्होंने संबंधित अवधि में कंपनी के शेयर खरीदे थे और जिन्हें कथित रूप से नुकसान हुआ है। फिलहाल यह एक प्रारंभिक जांच है और किसी अदालत द्वारा कंपनी के खिलाफ किसी प्रकार की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
इसी मामले में अन्य अमेरिकी कानून फर्मों ने भी संभावित सिक्योरिटीज फ्रॉड दावों की जांच शुरू करने की घोषणा की है। उनका उद्देश्य यह मूल्यांकन करना है कि क्या कंपनी ने निवेशकों के समक्ष परियोजना की प्रगति, तकनीकी चुनौतियों या संभावित जोखिमों का पर्याप्त और समय पर खुलासा किया था।
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Gemini 3.5 Pro को गूगल की अगली पीढ़ी के उन्नत AI मॉडलों में शामिल माना जा रहा है। यह परियोजना ऐसे समय विकसित की जा रही है जब वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच जनरेटिव AI और बड़े भाषा मॉडल (LLMs) को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। ऐसे माहौल में किसी भी प्रमुख AI परियोजना में देरी निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की विशेष निगरानी में रहती है।
विश्लेषकों का कहना है कि AI क्षेत्र में भारी निवेश करने वाली कंपनियों के लिए परियोजनाओं की समयसीमा, तकनीकी प्रगति और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी निवेशकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी महत्वपूर्ण परियोजना में देरी या प्रदर्शन संबंधी समस्या सामने आती है, तो उसका सीधा प्रभाव शेयर मूल्य और निवेशकों के विश्वास पर पड़ सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में सिक्योरिटीज कानून सूचीबद्ध कंपनियों को निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली जानकारी का समय पर और सटीक खुलासा करने की जिम्मेदारी देते हैं। यदि किसी कंपनी पर यह आरोप लगता है कि उसने ऐसी जानकारी छिपाई या भ्रामक बयान दिए, तो उसके खिलाफ निवेशकों की ओर से सामूहिक मुकदमे (Class Action) या अन्य कानूनी दावे दायर किए जा सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही लिया जाता है।
फिलहाल Alphabet की ओर से इन जांचों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले समय में यदि जांच आगे बढ़ती है या कोई औपचारिक मुकदमा दायर होता है, तो कंपनी की ओर से अदालत में अपना पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल Alphabet तक सीमित नहीं है, बल्कि AI क्षेत्र में काम करने वाली सभी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए पारदर्शिता, जोखिम प्रकटीकरण और कॉरपोरेट गवर्नेंस के महत्व को भी रेखांकित करता है।
