केरल विधायक को ₹3 करोड़ में मंत्री पद दिलाने का झांसा देने वाले कथित साइबर ठगी गिरोह की जांच में मुख्य संदिग्ध दिल्ली में चिन्हित किया गया है।

आजमगढ़ में फर्जी योग शिक्षक भर्ती के नाम पर ₹1.60 करोड़ की ठगी का आरोप, 118 लोग बने शिकार

Roopa
By Roopa
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आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में सरकारी विद्यालयों में योग शिक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि 118 लोगों से करीब ₹1.60 करोड़ की ठगी की गई। पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों ने फर्जी नियुक्ति पत्र और कूटरचित विभागीय आदेश जारी कर उन्हें सरकारी प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में योग प्रशिक्षण देने के लिए भेज दिया। कई अभ्यर्थियों ने महीनों तक बच्चों को प्रशिक्षण भी दिया, लेकिन मानदेय नहीं मिलने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ।

फर्जी नियुक्ति पत्र देकर नौकरी का दिया झांसा

पीड़ितों के अनुसार, वर्ष 2025 में आरोपियों ने सरकारी स्कूलों में योग शिक्षक की नियुक्ति कराने का दावा किया और इसके बदले अभ्यर्थियों से रुपये लिए। आरोप है कि उन्हें निजी संस्था के नाम से नियुक्ति पत्र दिए गए और साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग तथा खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के नाम से कथित फर्जी आदेश भी उपलब्ध कराए गए।

एक शिकायतकर्ता अंकित जायसवाल ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी सुजाता जायसवाल को योग शिक्षक की नौकरी दिलाने का भरोसा देकर ₹1.35 लाख रुपये लिए गए। इसके बाद उन्हें मैक्स आइडिया मेडिटेशन, सफदरजंग एन्क्लेव, नई दिल्ली के नाम से नियुक्ति पत्र दिया गया।

कथित नियुक्ति पत्र में हर महीने ₹13,500 मानदेय दिए जाने का उल्लेख था।

15 विद्यालयों में कराया गया योग प्रशिक्षण

पीड़ितों का आरोप है कि फर्जी नियुक्ति आदेशों के आधार पर अभ्यर्थियों से जिले के करीब 15 सरकारी विद्यालयों में योग प्रशिक्षण कराया गया। इनमें प्राथमिक विद्यालय, जूनियर हाईस्कूल और कंपोजिट विद्यालय शामिल थे।

अभ्यर्थियों ने करीब डेढ़ से तीन महीने तक बच्चों को योग का प्रशिक्षण दिया। जब लंबे समय तक मानदेय का भुगतान नहीं हुआ तो उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

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जांच में फर्जी पाए गए दस्तावेज

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अभ्यर्थियों को बताया कि शासन स्तर से योग शिक्षकों की ऐसी कोई भर्ती प्रक्रिया संचालित नहीं की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तुत किए गए नियुक्ति पत्र और विभागीय आदेश प्रथम दृष्टया फर्जी पाए गए।

इसके बाद संबंधित विद्यालयों को ऐसे अभ्यर्थियों से कार्य न लेने के निर्देश दिए गए। विकासखंड कार्यालय की ओर से भी लोगों को ऐसी फर्जी भर्तियों से सावधान रहने की अपील की गई।

इसी तरह जहानागंज क्षेत्र की महुआ मुरारपुर निवासी संध्या राजभर ने भी आरोप लगाया कि उनसे ₹1.55 लाख की ठगी की गई।

पुलिस ने शुरू की जांच

पीड़ितों ने मुबारकपुर थाना और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शिकायत देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

जांच एजेंसियां अब कथित नियुक्ति पत्र, दस्तावेजों की सत्यता, पैसे के लेन-देन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मामले में लगाए गए आरोपों की अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच जारी है।

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