कानपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने कथित म्यूल बैंक खातों (Mule Accounts) के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 35 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों से लगभग ₹30 करोड़ के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन जुड़े पाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जा रहा था। मामले में आगे की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई कानपुर नगर पुलिस कमिश्नरेट के निर्देश पर पश्चिम जोन की साइबर सेल ने की। जांच के दौरान पश्चिम जोन के 10 अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों के आधार पर संदिग्ध खाताधारकों की पहचान की गई, जिसके बाद विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई आरोपियों ने कथित तौर पर कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को तेजी से विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने, नकदी निकालने और लेनदेन की वास्तविक कड़ी छिपाने के लिए किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग सक्रिय थे और धनराशि का अंतिम लाभार्थी कौन था।
अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों पर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 100 से अधिक शिकायतें दर्ज थीं। इन शिकायतों के आधार पर वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस विभिन्न बैंकों और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से धन के प्रवाह (Money Trail) का विश्लेषण कर रही है।
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जांच एजेंसियों का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर म्यूल खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी, ऑनलाइन ट्रेडिंग, फर्जी कस्टमर केयर, लोन, पार्ट-टाइम जॉब और अन्य साइबर ठगी से प्राप्त रकम को छिपाने के लिए करते हैं। ऐसे खातों के माध्यम से धन कई स्तरों पर स्थानांतरित किया जाता है, जिससे जांच को जटिल बनाने का प्रयास किया जाता है।
Future Crime Research Foundation से जुड़े साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूल बैंक खाते आज संगठित साइबर अपराध नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन चुके हैं। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कमीशन या अन्य लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग या यूपीआई सुविधा किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध नहीं करानी चाहिए, क्योंकि ऐसी गतिविधि गंभीर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपने बैंक खाते का उपयोग अवैध वित्तीय लेनदेन के लिए होने देता है, तो परिस्थितियों के आधार पर उसके विरुद्ध विभिन्न आपराधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि केवल गिरफ्तारी या प्राथमिकी दर्ज होने से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अंतिम निर्णय न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर करेगा।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड तथा वित्तीय लेनदेन की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों या संगठित साइबर नेटवर्क की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और साइबर ठगी से जुड़े पूरे वित्तीय नेटवर्क का विश्लेषण किया जा रहा है।
