देश के चर्चित फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग निवेश घोटाले की जांच में तेलंगाना सीआईडी को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने एक डिजिटल पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने कथित निवेश धोखाधड़ी के संचालन में अहम भूमिका निभाई। एजेंसी का दावा है कि आरोपी ने मुख्य साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर पेमेंट गेटवे सेवाएं उपलब्ध कराईं, जिनके माध्यम से निवेशकों से बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार मामला फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग नामक मोबाइल एप्लिकेशन और वेबसाइट से जुड़ा है। आरोप है कि इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम पर फर्जी निवेश अवसर तैयार किए गए और लोगों को कम समय में अधिक रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित किया गया। निवेशकों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनकी राशि सुरक्षित है और निर्धारित अवधि में आकर्षक लाभ मिलेगा।
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सीआईडी जांच में सामने आया है कि इस कथित योजना के माध्यम से देशभर के 7,056 निवेशकों से लगभग ₹4,215 करोड़ की राशि जुटाई गई। जांच के अनुसार इनमें से 4,065 निवेशकों को लगभग ₹792 करोड़ की वित्तीय क्षति हुई। एजेंसी का आरोप है कि यह पूरी गतिविधि एम/एस कैपिटल प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से संचालित की जा रही थी, जो फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग ब्रांड के तहत काम कर रही थी।
मामले की शुरुआत विभिन्न राज्यों से प्राप्त शिकायतों के बाद हुई, जहां निवेशकों ने अपनी जमा पूंजी वापस न मिलने और वादे के अनुरूप रिटर्न बंद होने की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए और जांच को आगे बढ़ाने के लिए तेलंगाना सीआईडी को सौंप दिया गया। अधिकारियों के अनुसार देश के विभिन्न हिस्सों में मुख्य आरोपियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कई अन्य मामले भी दर्ज हैं।
जांच में गिरफ्तार किए गए वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एजेंसी का दावा है कि उसने कथित तौर पर मुख्य आरोपियों के साथ मिलकर निवेशकों से धन संग्रह की प्रक्रिया को सुगम बनाया। जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित डिजिटल पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनी को कथित धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेनों के बदले लगभग ₹7.53 करोड़ की आय प्राप्त हुई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन लेनदेनों की प्रकृति क्या थी और क्या कंपनी स्तर पर पर्याप्त अनुपालन प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
इस मामले में पहले भी कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें कंपनी के निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सभी ने मिलकर निवेशकों से अवैध रूप से धन एकत्र करने, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी गतिविधियों में भूमिका निभाई।
जांच के अनुसार यह योजना वर्ष 2021 से संचालित हो रही थी। आरोप है कि पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए लगातार नए निवेशकों से धन जुटाया जाता रहा, जिससे यह संरचना एक क्लासिक पोंजी स्कीम में बदल गई। शुरुआती चरण में निवेशकों को रिटर्न देकर विश्वास कायम किया गया, लेकिन समय के साथ नए निवेश की गति कम होने पर पूरी व्यवस्था लड़खड़ाने लगी।
महत्वपूर्ण साइबर वित्तीय अपराध मामले पर टिप्पणी करते हुए प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आज के निवेश घोटाले पारंपरिक ठगी से कहीं अधिक जटिल हो चुके हैं। उनके अनुसार अपराधी तकनीक, डिजिटल भुगतान प्रणालियों और फर्जी कॉर्पोरेट पहचान का उपयोग कर निवेशकों का भरोसा जीतते हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक रिटर्न के वादों और अपारदर्शी निवेश मॉडलों को हमेशा सतर्कता के साथ परखना चाहिए।
जांच एजेंसियों के अनुसार एकत्र की गई धनराशि को कई शेल कंपनियों के माध्यम से विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया। जनवरी 2025 तक आते-आते योजना पूरी तरह ढह गई, निवेशकों को रिटर्न मिलना बंद हो गया और हैदराबाद स्थित कार्यालय बंद कर दिया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में निवेशकों ने शिकायतें दर्ज कराईं। अब सीआईडी धन के अंतिम प्रवाह, लाभार्थियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। मामले में आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
