गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम में साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर एक सेवानिवृत्त भारतीय वायुसेना अधिकारी को निवेश के नाम पर ₹2.5 करोड़ से अधिक की ठगी का शिकार बनाने का आरोप है। मामले की जांच के दौरान दुबई से संभावित कनेक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों और कथित SIM Box नेटवर्क के संकेत मिलने के बाद जांच का दायरा और व्यापक कर दिया गया है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब पालम विहार निवासी एक सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी ने साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्हें आकर्षक निवेश अवसर का झांसा देकर बड़ी राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। शुरुआती जांच में अधिकारियों ने धन के प्रवाह का विश्लेषण किया और बैंकिंग लेनदेन के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
जांचकर्ताओं के अनुसार, करीब ₹15 लाख की एक संदिग्ध राशि मुंबई स्थित एक निजी कंपनी के बैंक खाते में पहुंची थी। इस खाते से जुड़े मोबाइल नंबरों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण सुराग सामने आया, जिसने जांच टीम को दिल्ली के विवेक विहार स्थित एक फ्लैट तक पहुंचाया। इसके बाद की गई छापेमारी में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जनक (27), दिनेश कुमार (30) और पवन कुमार (26) के रूप में हुई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि तीनों पिछले कुछ महीनों से एक संगठित साइबर नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि वे कथित तौर पर Telegram जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नेटवर्क से जुड़े थे और निर्देशों के अनुसार बैंक खातों में आने वाली राशि को आगे विभिन्न खातों में स्थानांतरित करते थे।
छापेमारी के दौरान बरामद सामग्री ने जांच को और गंभीर बना दिया। अधिकारियों ने 36 मोबाइल फोन, 53 एटीएम कार्ड, 24 बैंक पासबुक, पांच चेकबुक और दो आईपी कैमरे जब्त किए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़ी गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन को संचालित करने में किया जा सकता था।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
सबसे महत्वपूर्ण पहलू कथित SIM Box नेटवर्क से जुड़ा है। जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों के पास से मिले उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि वे एक SIM Box ऑपरेशन स्थापित करने की तैयारी में थे। SIM Box एक ऐसा उपकरण होता है जिसमें बड़ी संख्या में SIM कार्ड लगाए जा सकते हैं और इसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है। साइबर अपराधी इसका उपयोग कॉल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाने, फर्जी कॉल सेंटर संचालन और OTP आधारित धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए करते हैं।
जांच के दौरान बरामद मोबाइल डेटा और बैंक खातों की जानकारी का मिलान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के रिकॉर्ड से किया गया। अधिकारियों के अनुसार, इससे देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज कम से कम 15 शिकायतों का पता चला, जिनमें कुल कथित नुकसान लगभग ₹3.75 करोड़ बताया गया है। ये शिकायतें कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों से संबंधित हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि नेटवर्क से जुड़े और भी मामले सामने आ सकते हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि संगठित साइबर अपराध गिरोह अब निवेश धोखाधड़ी, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और मनी म्यूल नेटवर्क का संयुक्त उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, अपराधी अक्सर बैंक खातों के माध्यम से धन की परतें बनाकर जांच को जटिल बनाने का प्रयास करते हैं, जबकि SIM Box जैसी तकनीकों से अपनी पहचान और लोकेशन छिपाते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी निवेश प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी वैधता की स्वतंत्र जांच अवश्य करें।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों को कथित तौर पर प्रति माह लगभग ₹25,000 का भुगतान किया जाता था और धन के हस्तांतरण की मात्रा के आधार पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाता था। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क के संचालकों और कथित मास्टरमाइंड की पहचान करने के लिए वित्तीय लेनदेन, मोबाइल रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच जारी है। दुबई से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल तीनों आरोपी हिरासत में हैं और जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ से साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।
