निवेशकों को आकर्षक मुनाफे और वित्तीय प्रोत्साहन का वादा कर धन जुटाने का आरोप; अब तक 252 निवेशकों ने ₹3.17 करोड़ से अधिक के नुकसान की शिकायत दर्ज कराई

ऊंचे रिटर्न का लालच, करोड़ों की ठगी का आरोप: मल्टी-लेवल मार्केटिंग कंपनी के 38 आरोपी TNPID अदालत में पेश

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By Roopa
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कोयंबटूर। तमिलनाडु में कथित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) निवेश घोटाले से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में 38 आरोपी गुरुवार को तमिलनाडु प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स ऑफ डिपॉजिटर्स (TNPID) अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत में पेश हुए। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज इस मामले में आरोप है कि एक निजी मार्केटिंग कंपनी ने निवेशकों को आकर्षक रिटर्न, बोनस और वित्तीय प्रोत्साहन का लालच देकर बड़ी मात्रा में धन जुटाया, लेकिन बाद में वादा किए गए लाभ उपलब्ध नहीं कराए गए।

जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में कंपनी के प्रबंध निदेशक शक्ति आनंद सहित कुल 38 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि कंपनी ने तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में निवेश योजनाओं का व्यापक प्रचार किया और लोगों को कम समय में अधिक लाभ का भरोसा देकर निवेश के लिए प्रेरित किया। कथित तौर पर कंपनी की योजनाओं को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि निवेशकों को नियमित आय और अतिरिक्त प्रोत्साहन प्राप्त होने का विश्वास हो गया।

आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारियों के मुताबिक, जब निवेशकों को वादा किए गए रिटर्न नहीं मिले और भुगतान में लगातार देरी होने लगी, तब बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आनी शुरू हुईं। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कई निवेशकों ने अपनी बचत और अन्य वित्तीय संसाधनों का उपयोग कर कंपनी की योजनाओं में धन लगाया था।

अधिकारियों के अनुसार, अब तक 252 निवेशकों ने शिकायत दर्ज कराई है और उनके द्वारा बताए गए कुल वित्तीय नुकसान का आंकड़ा लगभग ₹3.17 करोड़ तक पहुंच चुका है। हालांकि जांच एजेंसियों का मानना है कि मामले का दायरा इससे अधिक बड़ा हो सकता है और आगे की जांच में अतिरिक्त निवेशकों तथा अधिक वित्तीय नुकसान की जानकारी सामने आ सकती है।

जांच के दौरान आर्थिक अपराध शाखा ने बड़ी मात्रा में दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, निवेश संबंधी विवरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्र किए। मामले की जटिलता और निवेशकों की संख्या को देखते हुए एजेंसी ने विस्तृत जांच के बाद अदालत में 94,063 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल किया है। माना जा रहा है कि आरोपपत्र में कंपनी की कार्यप्रणाली, धन संग्रह की प्रक्रिया, निवेश योजनाओं की संरचना और विभिन्न आरोपियों की कथित भूमिकाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल है।

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गुरुवार को जब मामला विशेष अदालत में सुनवाई के लिए आया तो सभी 38 आरोपी न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 29 जून निर्धारित की है। इस दौरान आरोपियों को आरोपपत्र की प्रतियां उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया पूरी किए जाने की संभावना है, जिसके बाद मुकदमे की आगे की कार्यवाही शुरू होगी।

वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में मल्टी-लेवल मार्केटिंग और उच्च रिटर्न वाले निवेश मॉडलों के नाम पर लोगों को लुभाने के मामलों में वृद्धि देखी गई है। ऐसे मामलों में निवेशकों को अक्सर सीमित समय में असाधारण लाभ का वादा किया जाता है, जबकि वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों और राजस्व स्रोतों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, किसी भी निवेश योजना में असामान्य रूप से ऊंचे और सुनिश्चित रिटर्न का दावा सतर्कता का संकेत माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि निवेशकों को किसी भी योजना में धन लगाने से पहले कंपनी की वैधानिक स्थिति, नियामकीय अनुपालन, व्यवसाय मॉडल और वित्तीय रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया, रेफरल नेटवर्क और व्यक्तिगत सिफारिशों के आधार पर निवेश निर्णय लेने से पहले तथ्यों का सत्यापन आवश्यक है।

फिलहाल आर्थिक अपराध शाखा मामले की जांच जारी रखे हुए है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित धन संग्रह की कुल राशि कितनी थी तथा क्या राज्य के अन्य हिस्सों में भी इसी प्रकार के निवेशकों को प्रभावित किया गया। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं ताकि कथित रूप से जुटाई गई धनराशि के प्रवाह का पूरा विवरण सामने लाया जा सके। अदालत में आगे की सुनवाई के साथ इस बहुचर्चित मामले की कानूनी प्रक्रिया अब अगले चरण में प्रवेश करने जा रही है।

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