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ईडी ने कानपुर के किडनी कांड में दर्ज किया मुकदमा: मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच तेज

Team The420
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लखनऊ, विशेष संवाददाता। कानपुर के बहुचर्चित किडनी कांड में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी आधिकारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई मामले में पहले से दर्ज पुलिस एफआईआर के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है। ईडी की एंट्री के बाद अब इस पूरे प्रकरण में आर्थिक लेन-देन, संपत्ति और धन के स्रोतों की गहराई से जांच शुरू हो गई है, जिससे मामले का दायरा और व्यापक हो गया है।

जांच के दायरे में आहूजा अस्पताल के संचालक डा. सुरजीत सिंह आहूजा और उनकी पत्नी डा. प्रीति आहूजा सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। डा. प्रीति आहूजा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह पूरा नेटवर्क केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कई अस्पतालों, एजेंटों और बिचौलियों का संगठित सिंडिकेट सक्रिय था, जो किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर अवैध वसूली और लेन-देन में शामिल था।

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सूत्रों के अनुसार, इस रैकेट के माध्यम से किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 50 से 70 लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए दर्जनों अवैध ट्रांसप्लांट किए गए हैं और पूरे सिंडिकेट ने लंबे समय तक एक संगठित तरीके से काम किया। इसमें मरीजों और जरूरतमंदों को निशाना बनाकर अवैध रूप से अंगों की खरीद-फरोख्त की जाती थी, जिससे भारी मात्रा में नकद लेन-देन हुआ।

ईडी अब इस मामले में धन के प्रवाह को ट्रैक कर रही है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि मरीजों से ली गई रकम कहां और किस माध्यम से भेजी गई। इसके साथ ही आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और बेनामी संपत्तियों की भी गहन जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अवैध कमाई को किस तरह से वैध आर्थिक गतिविधियों में बदलने का प्रयास किया गया।

इस मामले में एक अहम घटना 29 मार्च की रात की बताई जा रही है, जब केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में एक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। इस प्रक्रिया में मुजफ्फरनगर की एक महिला मरीज के लिए बिहार के बेगूसराय निवासी एक व्यक्ति ने अपनी किडनी कथित रूप से बेची थी। इसके बाद 30 मार्च को मामला उजागर हुआ, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच में विदेशी नागरिकों से जुड़े ट्रांसप्लांट की आशंका भी सामने आई है, जिससे इस रैकेट के अंतरराष्ट्रीय लिंक की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

कानपुर पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया था कि केवल एक अस्पताल ही नहीं, बल्कि अन्य निजी अस्पताल और कुछ एजेंट भी इस नेटवर्क से जुड़े थे। मेडलाइफ हॉस्पिटल और प्रिया अस्पताल जैसे संस्थानों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है, जहां संदिग्ध ट्रांसप्लांट और एजेंटों की गतिविधियों की बात सामने आई थी। एजेंटों के माध्यम से डोनर और रिसीवर को जोड़ने का एक पूरा तंत्र सक्रिय था, जो मोटी रकम के बदले किडनी उपलब्ध कराता था।

ईडी अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल अवैध ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा आर्थिक अपराध छिपा हो सकता है, जिसमें नकदी के माध्यम से अवैध कमाई को विभिन्न चैनलों के जरिए घुमाया गया। जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इस पूरे सिंडिकेट का संचालन कैसे होता था और इसमें किन-किन स्तरों पर लोग शामिल थे।

फिलहाल ईडी की जांच प्रारंभिक चरण में है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में संपत्ति जब्ती, बैंक खातों की सीलिंग और अन्य बड़ी कार्रवाई संभव है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस रैकेट से जुड़े और नाम तथा नए तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे पूरे किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट की परतें पूरी तरह उजागर हो सकेंगी।

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