दिल्ली पुलिस ने फर्जी निवेश योजना में ₹80 लाख की ठगी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब ₹25 लाख के शेयर फ्रीज किए हैं।

भदोही में करोड़ों के साइबर इन्वेस्टमेंट रैकेट का भंडाफोड़: फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट से देशभर में 100+ शिकायतें

Team The420
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साइबर पुलिस ने एक बड़े देशव्यापी निवेश एवं ट्रेडिंग फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के खिलाफ अलग-अलग राज्यों से 100 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।

यह गिरोह व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सोशल मीडिया पर सक्रिय फर्जी निवेश ग्रुपों के जरिए लोगों को कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। धीरे-धीरे निवेश बढ़वाकर बड़ी रकम हड़प ली जाती थी और बाद में पूरी प्रणाली को बंद कर दिया जाता था।

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गिरफ्तार आरोपियों में मन्नू सिंह और उसके सहयोगी शामिल हैं, जिन पर देश के कई राज्यों से साइबर ठगी के दर्जनों मामले दर्ज हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में 50 से अधिक म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया, जिनके जरिए अवैध धन को एक जगह से दूसरी जगह घुमाया जाता था।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह ‘FISD PRO’ नामक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म चलाता था, जो देखने में असली निवेश वेबसाइट जैसा लगता था लेकिन पूरी तरह नियंत्रित सिस्टम था। इसी प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों को आकर्षक ग्राफ, झूठे रिटर्न और फर्जी लाभ दिखाकर भरोसा जीत लिया जाता था।

शुरुआती चरण में छोटे निवेश पर लाभ दिखाया जाता था ताकि निवेशकों का विश्वास बढ़े। इसके बाद धीरे-धीरे बड़ी रकम डलवाई जाती थी। जैसे ही रकम बढ़ती थी, निकासी प्रक्रिया को तकनीकी दिक्कत या टैक्स नियमों का हवाला देकर रोक दिया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और कई मामलों में कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग किया गया। पहचान छिपाने के लिए आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों में हेरफेर कर नए सिम कार्ड और बैंकिंग प्रोफाइल तैयार की जाती थीं।

ठगी की रकम को तुरंत कई लेयर में ट्रांसफर कर क्रिप्टो वॉलेट और अन्य डिजिटल माध्यमों में बदल दिया जाता था, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके और जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।

गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया पर आकर्षक प्रोफाइल बनाकर खुद को निवेश विशेषज्ञ और सलाहकार के रूप में पेश करते थे। इसके अलावा सैकड़ों लोगों को व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों में जोड़कर लगातार निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था।

फर्जी प्लेटफॉर्म पर दिखाए गए लाभ पूरी तरह सिस्टम-जनरेटेड थे और उनका वास्तविक बाजार से कोई संबंध नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बैंकिंग सतर्कता और केवाईसी प्रक्रिया की कमजोरियों का फायदा उठाया जाता है।

गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े नेटवर्क में ओमप्रकाश गौतम समेत कई फरार आरोपी शामिल हैं, जिनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है और इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी हो सकते हैं।

पुलिस ने बताया कि अब तक की जांच में करोड़ों रुपये के लेन-देन की पुष्टि हो चुकी है और कई बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। पूरे मामले में डिजिटल साक्ष्य और ट्रांजैक्शन की फॉरेंसिक जांच जारी है।

यह मामला संगठित साइबर अपराध का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें तकनीक, फर्जी पहचान और वित्तीय नेटवर्क का बड़े स्तर पर दुरुपयोग किया गया। आगे की जांच में और बड़े खुलासे तथा गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।

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