गाजियाबाद पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की कथित ठगी करने वाले गिरोह के दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर 64 पासपोर्ट और नकदी बरामद की।

सचिवालय नौकरी का झांसा देकर ₹10 लाख की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र देकर युवती को लगाया चूना; मुकदमा दर्ज

Team The420
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उत्तर प्रदेश के बांसगांव क्षेत्र में एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहां सचिवालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवती से ₹10 लाख की ठगी किए जाने का आरोप लगा है। मामले में फर्जी नियुक्ति पत्र देने और धोखे से बड़ी रकम ऐंठने के आरोप में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह मामला देवरिया जिले की रहने वाली पीड़िता खुशी यादव से जुड़ा है, जिन्होंने बांसगांव निवासी एक व्यक्ति विनय तिवारी उर्फ विपिन तिवारी (निवासी कौड़ीराम, थाना बांसगांव) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि आरोपी ने खुद को प्रभावशाली संपर्कों वाला बताते हुए लखनऊ सचिवालय में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया और धीरे-धीरे बड़ी रकम वसूल ली।

पीड़िता के अनुसार, नौकरी दिलाने के नाम पर आरोपी ने उनसे कुल ₹10 लाख की मांग की और यह राशि अलग-अलग माध्यमों से ली गई। इसमें ₹3.50 लाख रुपये आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए, जबकि शेष ₹6.50 लाख रुपये नकद के रूप में लिए गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने भरोसा बनाए रखने के लिए लगातार आश्वासन दिया कि जल्द ही नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

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मामले में आगे आरोप है कि 14 अप्रैल 2026 को आरोपी ने कौड़ीराम में पीड़िता को एक नियुक्ति पत्र सौंपा और कहा कि वह लखनऊ सचिवालय जाकर अपनी जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी करें। इस दस्तावेज को देखकर पीड़िता को विश्वास हो गया कि नौकरी मिल गई है, जिसके बाद वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत लखनऊ सचिवालय पहुंचीं।

हालांकि, सचिवालय में संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेज की जांच किए जाने पर बड़ा खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि दिया गया नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी है और उसका किसी भी सरकारी विभाग या आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। अधिकारियों ने दस्तावेज को अमान्य घोषित कर दिया, जिसके बाद पीड़िता को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ।

इसके बाद पीड़िता ने वापस लौटकर बांसगांव थाने में पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी विनय तिवारी उर्फ विपिन तिवारी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच शुरू कर दी गई है और लेनदेन, दस्तावेजों तथा आरोपों की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि क्या आरोपी किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा है या फिर उसने अकेले ही इस प्रकार की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या अन्य लोगों को भी इसी तरह नौकरी दिलाने के नाम पर ठगा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में अक्सर फर्जी नियुक्ति पत्र, नकली सरकारी पहचान और प्रभावशाली संपर्कों का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया जाता है। कई बार पीड़ित भरोसे में आकर बड़ी रकम दे देते हैं और बाद में उन्हें वास्तविकता का पता चलता है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और बैंक ट्रांजैक्शन, नकद लेनदेन तथा आरोपी के संपर्कों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और यदि अन्य लोग भी इस प्रकरण में शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े लगातार बढ़ रहे हैं और लोगों को ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर बिना सत्यापन के भरोसा नहीं करना चाहिए।

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