काशीपुर (जसपुर खुर्द, ऊधम सिंह नगर) में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) का अधिकारी बताकर एक वृद्ध के बैंक खाते से ₹29 लाख से अधिक की रकम उड़ा ली। आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए फर्जी ऐप भेजकर मोबाइल फोन में इंस्टॉल कराया और इसके बाद बैंक खाते में सेंध लगाकर 9 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में पूरी राशि निकाल ली।
पीड़ित सुधेश कुमार के अनुसार, उनका संयुक्त खाता पीएनबी की माता मंदिर रोड शाखा, काशीपुर में है। 6 जून को उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को बैंक अधिकारी बताया। आरोपी ने कहा कि खाते के सुचारू संचालन के लिए “PNB One” मोबाइल एप इंस्टॉल करना जरूरी है।
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इसके बाद ठग ने व्हाट्सएप पर एक फाइल भेजी, जिसे असली बैंकिंग ऐप जैसा दिखाया गया था। पीड़ित को निर्देश दिया गया कि वह उसमें अपनी बैंकिंग जानकारी और जरूरी विवरण भरें। शुरुआती चरण में ऐप सही तरीके से काम नहीं कर रहा था, लेकिन कॉलर लगातार दबाव बनाता रहा और प्रक्रिया पूरी करने को कहता रहा।
कुछ समय बाद पीड़ित को संदेह हुआ और उन्होंने ऐप को बंद कर दिया, लेकिन तब तक उनके मोबाइल में संवेदनशील जानकारी एक्सेस की जा चुकी थी। अगले ही दिन उनके फोन पर बैंक ट्रांजेक्शन के कई अलर्ट आने लगे, जिससे उन्हें धोखाधड़ी का पता चला।
बैंक स्टेटमेंट की जांच में सामने आया कि 6 और 7 जून के बीच कुल 9 ट्रांजेक्शन किए गए थे, जिनमें IMPS और RTGS के माध्यम से पूरी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई। कुल मिलाकर ₹29.22 लाख की ठगी की पुष्टि हुई है।
घटना सामने आने के बाद पीड़ित ने तुरंत बैंक से संपर्क कर खाता फ्रीज कराया और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन कुमाऊं परिक्षेत्र, रुद्रपुर को ट्रांसफर किया गया।
साइबर पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि ठगों ने एक संगठित तरीके से इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। फर्जी ऐप और व्हाट्सएप लिंक के जरिए मोबाइल में एक्सेस प्राप्त कर बैंकिंग डिटेल्स चुराई गईं और फिर तुरंत अलग-अलग म्यूल खातों में रकम ट्रांसफर कर दी गई, ताकि पैसे की ट्रेल को ट्रैक करना मुश्किल हो सके।
अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि पीड़ित को शुरुआत में यह समझ ही नहीं आता कि उनके मोबाइल या बैंकिंग ऐप के साथ छेड़छाड़ हो चुकी है। इसी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी कुछ ही मिनटों में पूरी राशि निकाल लेते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस तरह के फ्रॉड में नकली बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना और व्हाट्सएप पर फर्जी एप्लिकेशन भेजना एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है। इसमें यूजर को भरोसे में लेकर उसकी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बैंक द्वारा व्हाट्सएप पर ऐप डाउनलोड कराने या निजी जानकारी मांगने की प्रक्रिया नहीं होती। ऐसे मामलों में यूजर्स की थोड़ी सी लापरवाही भी भारी वित्तीय नुकसान का कारण बन सकती है।
पुलिस ने बताया कि ट्रांजेक्शन डिटेल्स, मोबाइल नंबर और बैंक खातों की तकनीकी जांच की जा रही है। इसके साथ ही म्यूल खातों की पहचान कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ऐप पर भरोसा न करें और बैंकिंग संबंधी किसी भी प्रक्रिया की पुष्टि सीधे बैंक शाखा या आधिकारिक हेल्पलाइन से ही करें।
फिलहाल मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच जारी है और साइबर पुलिस ने कहा है कि आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि डिजिटल बैंकिंग के दौर में साइबर सतर्कता बेहद जरूरी है।
