अजमेर में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें शेयर मार्केट में भारी मुनाफे का झांसा देकर एचएमटी से सेवानिवृत्त 74 वर्षीय अधिकारी मूलचंद केवलानी से कुल ₹21.37 लाख की धोखाधड़ी कर ली गई।
आरोपियों ने खुद को कोटक सिक्योरिटीज से जुड़ा अधिकृत प्रतिनिधि और सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार बताकर पीड़ित का भरोसा जीता और उन्हें निवेश के नाम पर विभिन्न बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में ठगों ने पीड़ित के खाते में लगभग ₹3.01 लाख रुपये रिटर्न के रूप में भेजे, ताकि विश्वास कायम हो सके और वह अधिक निवेश करने के लिए तैयार हो जाए।
FCRF Launches Chief AI Officer Certification to Build India’s AI Governance Leaders
इसके बाद फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच पीड़ित ने अलग-अलग चरणों में विभिन्न खातों में लगातार धनराशि भेजी, जिसे साइबर अपराधियों ने तुरंत निकाल लिया। जैसे ही पूरी प्रक्रिया पूरी हुई, आरोपियों ने अपने मोबाइल नंबर बंद कर दिए और व्हाट्सएप ग्रुप भी निष्क्रिय कर दिया, जिससे पीड़ित को धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और बैंक से संपर्क कर अपने खाते को फ्रीज कराया।मामले की सूचना मिलने पर साइबर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और डिजिटल ट्रांजेक्शन तथा बैंक खातों की तकनीकी जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार ठगों ने एक संगठित नेटवर्क के तहत इस पूरे फ्रॉड को अंजाम दिया, जिसमें म्यूल खातों का उपयोग कर धनराशि को कई स्तरों पर ट्रांसफर किया गया ताकि पैसों के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो सके। जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसे निवेश फ्रॉड में शुरुआत में छोटे रिटर्न देकर भरोसा बनाया जाता है और बाद में बड़ी रकम हड़प ली जाती है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि सेबी रजिस्टर्ड या अधिकृत संस्था का दावा करने वाले किसी भी अनजान निवेश प्रस्ताव पर बिना सत्यापन के भरोसा नहीं करना चाहिए। पुलिस अब आरोपियों की पहचान, बैंक खातों के संचालन और मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच के आधार पर नेटवर्क को ट्रेस करने में जुटी है।
अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध निवेश लिंक, कॉल या व्हाट्सएप ग्रुप से सतर्क रहें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें। पिछले कुछ महीनों में देशभर में शेयर मार्केट निवेश के नाम पर साइबर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है।
ठग सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और कॉल सेंटर जैसी तकनीकों का उपयोग कर लोगों को जल्दी मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं। कई मामलों में पहले छोटे-छोटे रिटर्न देकर विश्वास बनाया जाता है ताकि पीड़ित और अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित हो जाएं।
बाद में अचानक सभी संपर्क बंद कर दिए जाते हैं और पीड़ित को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ता है। साइबर पुलिस ने बताया कि ऐसे मामलों में डिजिटल ट्रांजेक्शन को ट्रैक करने के लिए विशेष तकनीकी टीम सक्रिय की गई है।
म्यूल खातों का उपयोग साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन चुका है, जिससे धन की वास्तविक पहचान छिपाई जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक और यूजर्स दोनों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। साइबर अपराधियों द्वारा उपयोग किए जा रहे नए तरीकों को देखते हुए बैंकिंग सिस्टम में लगातार सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान निवेश लिंक या ग्रुप जॉइन करने से पहले उसकी पूरी जांच करें और आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें। ऐसे फ्रॉड मामलों में अक्सर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी शामिल होते हैं, जो डिजिटल माध्यमों से संचालन करते हैं।
फिलहाल साइबर थाना पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया गया है। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल निवेश में सावधानी बरतने की आवश्यकता को उजागर किया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराध लगातार नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
