MHA और I4C ने बैंकों और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स को निशाना बना रहे AI डीपफेक फ्रॉड को लेकर देशव्यापी चेतावनी जारी की है।

एमएचए ने बैंकों और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स को निशाना बना रहे एआई डीपफेक फ्रॉड पर जारी की देशव्यापी चेतावनी

Team The420
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गृह मंत्रालय (MHA) ने देशभर में एक बड़ा अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डीपफेक फ्रॉड तेजी से भारत के बैंकिंग और फिनटेक सिस्टम को निशाना बना रहा है। यह चेतावनी भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के माध्यम से जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि साइबर अपराधी अब अत्याधुनिक एआई तकनीक का उपयोग कर फर्जी पहचान तैयार कर रहे हैं और डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों को बायपास कर रहे हैं।

एडवाइजरी के अनुसार, ठग हाई-टेक एआई टूल्स की मदद से बेहद वास्तविक दिखने वाले डीपफेक वीडियो, वॉइस क्लोन और सिंथेटिक फेस आईडी तैयार कर रहे हैं। इनका उपयोग आधुनिक वेरिफिकेशन सिस्टम—जैसे फेसियल रिकग्निशन, लाइवनेस डिटेक्शन और वीडियो आधारित केवाईसी (KYC)—को धोखा देने के लिए किया जा रहा है। इससे भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी आमतौर पर सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स, जॉब पोर्टल्स, डेटिंग प्लेटफॉर्म या सीधे फोन कॉल के जरिए संपर्क शुरू करते हैं। पीड़ितों को वीडियो कॉल में उलझाया जाता है, जहां उनकी सामान्य गतिविधियां—जैसे आंख झपकाना, बोलना या सिर हिलाना—एआई मॉडल ट्रेनिंग के लिए रिकॉर्ड कर ली जाती हैं।

इन रिकॉर्डिंग्स को बाद में एडवांस मशीन लर्निंग सिस्टम से प्रोसेस कर डीपफेक तैयार किया जाता है, जो चेहरे के हावभाव, आवाज और आंखों की गतिविधियों की नकल करने में सक्षम होते हैं। इसके बाद इन फर्जी पहचानों का उपयोग बैंक खातों तक पहुंच बनाने, वेरिफिकेशन पास करने और डिजिटल वॉलेट्स को सक्रिय करने में किया जाता है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि ये वेरिफिकेशन सिस्टम सफलतापूर्वक बायपास हो जाते हैं, तो अपराधी फर्जी केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं, नए बैंक खाते खोल सकते हैं और मौजूदा खातों पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं। यह स्थिति डिजिटल वित्तीय प्रणाली के लिए बड़ा खतरा है, जो पूरी तरह ऑनलाइन वेरिफिकेशन पर निर्भर हो रही है।

I4C ने स्पष्ट किया है कि एआई आधारित पहचान धोखाधड़ी एक उभरता हुआ और तेजी से बढ़ता साइबर खतरा है। इस कारण बैंकिंग संस्थानों और फिनटेक कंपनियों को तुरंत अपनी ऑनबोर्डिंग और ऑथेंटिकेशन प्रणाली को मजबूत करने की सलाह दी गई है। साथ ही डीपफेक डिटेक्शन तकनीक और सिंथेटिक मीडिया पहचान टूल्स को सुरक्षा ढांचे में शामिल करने पर जोर दिया गया है।

नागरिकों के लिए भी कई सुरक्षा उपाय बताए गए हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि जहां संभव हो, अपने बायोमेट्रिक डेटा को लॉक रखें, बैंक अलर्ट्स पर नजर रखें और अनजान वीडियो कॉल या संदिग्ध बातचीत से सतर्क रहें। साथ ही किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी आवाज या वीडियो डेटा साझा न करने की चेतावनी दी गई है।

संदिग्ध धोखाधड़ी या पहचान चोरी की स्थिति में पीड़ितों को तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है। अधिकारियों ने जोर दिया है कि समय पर रिपोर्ट करने से ठगी की गई रकम को फ्रीज करने की संभावना बढ़ जाती है।

इसके अलावा, यदि अचानक मोबाइल नेटवर्क गायब हो जाए तो तुरंत टेलीकॉम सेवा प्रदाता से संपर्क करने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह सिम स्वैप फ्रॉड का संकेत हो सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह एडवाइजरी समय पर उठाया गया कदम है, क्योंकि एआई आधारित फ्रॉड तकनीक तेजी से परिष्कृत हो रही है और पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों को चुनौती दे रही है।

इस बीच साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी Triveni Singh ने कहा है कि एआई और वित्तीय धोखाधड़ी का मेल एक नई पीढ़ी के साइबर अपराध को जन्म दे रहा है। उनके अनुसार, डीपफेक आधारित स्कैम इसलिए अधिक खतरनाक हैं क्योंकि इनमें तकनीकी छल के साथ मनोवैज्ञानिक दबाव भी शामिल होता है, जिससे पीड़ित आसानी से फंस जाते हैं।

अधिकारियों का मानना है कि इस खतरे से निपटने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति जरूरी है, जिसमें मजबूत कानून, एआई आधारित डिटेक्शन सिस्टम और जन-जागरूकता अभियान शामिल हों। वित्तीय संस्थानों को भी हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन और रिमोट ऑनबोर्डिंग के लिए सख्त नियम अपनाने की सलाह दी गई है।

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से विकास किया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधियों के लिए नए अवसर भी पैदा हुए हैं। इसी कारण सरकार और एजेंसियां लगातार सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में जुटी हैं।

गृह मंत्रालय ने दोहराया है कि सरकार, बैंकिंग संस्थानों और तकनीकी कंपनियों के बीच सहयोग ही इस उभरते खतरे से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी डिजिटल बातचीत से पहले पूरी तरह सत्यापन करें और सतर्क रहें।

फिलहाल इस तरह के एआई आधारित फ्रॉड नेटवर्क की जांच जारी है और एजेंसियां इन तकनीकों को विकसित करने और फैलाने वाले समूहों की पहचान करने में जुटी हैं।

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