हैदराबाद पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने कहा कि साइबर ठगी से शहर में रोजाना करीब ₹1 करोड़ का नुकसान हो रहा है।

मोबाइल अपडेट मैसेज स्कैम: फर्जी ‘फोन अपडेट’ लिंक पर क्लिक करते ही खाते से मिनटों में निकले ₹99,000

Team The420
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बिशनखेड़ी गांव के एक निवासी साइबर ठगी का शिकार हो गए, जब उन्होंने फर्जी “फोन अपडेट” मैसेज पर क्लिक कर दिया। इसके बाद उनके बैंक खाते से कुछ ही मिनटों में ₹99,000 निकाल लिए गए। इस घटना ने एक बार फिर उन डिजिटल घोटालों की बढ़ती चुनौती को उजागर किया है, जिनमें नकली सिस्टम अलर्ट के जरिए लोगों को फंसाया जाता है।

शिकायत के अनुसार, पनवाड़ क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप पर कार्यरत सुरेंद्र नागर ड्यूटी पर थे, तभी उनके मोबाइल फोन पर अचानक एक पॉप-अप आया। उसमें “फोन अपडेट आवश्यक” का संदेश और एक काउंटडाउन टाइमर दिख रहा था, जिससे यह किसी आधिकारिक सिस्टम अलर्ट जैसा प्रतीत हो रहा था। इसे सामान्य अपडेट समझकर उन्होंने बिना संदेह के लिंक पर क्लिक कर दिया।

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लिंक पर क्लिक करने के कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर बैंक खाते से ₹99,000 डेबिट होने के कई एसएमएस अलर्ट आने लगे। ठगी का एहसास होते ही उन्होंने तुरंत अपने नियोक्ता को सूचना दी और साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर लेनदेन को रोकने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने अपने बैंक खाते को फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की ताकि और नुकसान न हो।

पीड़ित ने बाद में पनवाड़ थाने में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई, जिसमें बताया गया कि खाते में मौजूद अधिकांश राशि उनके कार्यस्थल की कमाई और संचालन से जुड़ी थी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यह राशि वापस नहीं मिली तो उन्हें और उनके परिवार को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है, जो दैनिक मजदूरी और सीमित आय पर निर्भर हैं।

पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साइबर अपराधियों का पता लगाने और ठगी में इस्तेमाल किए गए डिजिटल ट्रेल को ट्रैक करने के प्रयास जारी हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी लिंक किस स्रोत से भेजा गया और इसमें फर्जी एप्लिकेशन, फिशिंग लिंक या रिमोट एक्सेस टूल्स का इस्तेमाल हुआ या नहीं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि साइबर ठग लगातार “फोन अपडेट आवश्यक” या “सिस्टम अपग्रेड” जैसे नकली अलर्ट भेजकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। जैसे ही यूजर इन लिंक पर क्लिक करता है, मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है या डिवाइस का रिमोट एक्सेस मिल सकता है, जिससे बैंकिंग डिटेल्स चुराकर अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए जाते हैं।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह SMS, WhatsApp या पॉप-अप के माध्यम से ही क्यों न आया हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि असली मोबाइल अपडेट केवल आधिकारिक ऐप स्टोर या सिस्टम सेटिंग्स के जरिए आते हैं, न कि किसी टाइमर वाले संदिग्ध मैसेज के जरिए।

अधिकारियों ने यह भी सलाह दी कि किसी भी साइबर फ्रॉड की आशंका होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि त्वरित रिपोर्टिंग से ठगी गई राशि को फ्रीज कर वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।

यह घटना छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाती है, जहां साइबर खतरों की जागरूकता अभी भी सीमित है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठग अक्सर डर, जल्दबाजी और तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाकर ऐसे संदेश भेजते हैं जो असली सिस्टम अलर्ट जैसे लगते हैं।

प्रशासन अब साइबर जागरूकता अभियान तेज करने पर काम कर रहा है, जिसमें सुरक्षित ब्राउज़िंग, लिंक सत्यापन और बैंकिंग ऐप्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों और साइबर यूनिट्स के बीच समन्वित कार्रवाई से ही ऐसे तेजी से बढ़ते साइबर फ्रॉड पर रोक लगाई जा सकती है।

मामले की जांच जारी है और अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि आरोपियों की पहचान कर राशि वापस दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि एक गलत क्लिक भी कुछ ही सेकंड में बड़ा वित्तीय नुकसान कर सकता है।

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