ED ने ₹1,400 करोड़ के कथित SKNL बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुरुड स्थित करीब ₹60 करोड़ के सी-फेसिंग बंगले को अटैच किया।

₹1,400 करोड़ बैंक फ्रॉड केस में ED की बड़ी कार्रवाई: मुरुड का ₹60 करोड़ का सी-फेसिंग बंगला अटैच, SKNL और पूर्व CMD निशाने पर

Team The420
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बैंक लोन फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के मुरुड स्थित समुद्र किनारे बने करीब ₹60 करोड़ मूल्य के एक आलीशान बंगले को अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई SKNL (S Kumars Nationwide Limited) और इसके पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नितिन कासलीवाल के खिलाफ चल रही ₹1,400 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी जांच का हिस्सा है।

एजेंसी ने यह प्रोविजनल अटैचमेंट प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह संपत्ति उन फंड्स से खरीदी गई थी, जिन्हें बैंक लोन से “डायवर्ट” किया गया था। जांच में सामने आया है कि कंपनी को दिए गए बड़े कर्ज का इस्तेमाल निर्धारित व्यावसायिक उद्देश्यों के बजाय कथित तौर पर रियल एस्टेट और अन्य निजी निवेशों में किया गया।

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ED के अनुसार, बैंकिंग कंसोर्टियम से लिए गए क्रेडिट फंड्स को कई स्तरों पर अलग-अलग कंपनियों और संरचनाओं के जरिए घुमाया गया, ताकि असली स्रोत को छिपाया जा सके। इसी जटिल वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से कथित तौर पर घरेलू और विदेशी संपत्तियां खरीदी गईं, जिनमें मुरुड का यह बंगला भी शामिल है।

यह पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले जांच एजेंसी ने इसी केस में लंदन स्थित एक संपत्ति को भी अटैच किया था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹119.55 करोड़ बताई गई थी। वह संपत्ति बकिंघम पैलेस के पास स्थित है और उसे भी कथित तौर पर डायवर्ट किए गए बैंक फंड्स से खरीदा गया था।

जांच अधिकारियों का कहना है कि SKNL मामले में बैंक लोन का उपयोग कई स्तरों पर शेल कंपनियों और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से किया गया। इन ट्रांजैक्शनों का उद्देश्य फंड फ्लो को जटिल बनाना और उसकी ट्रैकिंग को मुश्किल करना बताया जा रहा है। एजेंसी अब पूरे फंड फ्लो मैप को तैयार करने में जुटी है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि बैंकिंग सिस्टम से निकली रकम आखिर किस तरह निजी संपत्तियों में बदली गई।

कंपनी पर आरोप है कि उसने बैंकों के एक कंसोर्टियम से बड़ी राशि का कर्ज लिया और बाद में उसे तय शर्तों के अनुसार उपयोग नहीं किया। कुल कथित घोटाले की राशि लगभग ₹1,400 करोड़ आंकी गई है।

ED ने यह भी कहा है कि इस मामले में लेयर्ड ट्रांजैक्शन और फर्जी संरचनाओं का इस्तेमाल किया गया, जिससे धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके। जांच एजेंसी का मानना है कि इस तरह की संरचनाएं अक्सर मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल होती हैं, जहां अवैध धन को वैध संपत्तियों में बदल दिया जाता है।

अटैच की गई संपत्ति फिलहाल प्रोविजनल है और आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगी। PMLA के तहत यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि संपत्ति अपराध की आय से खरीदी गई थी, तो उसे स्थायी रूप से जब्त किया जा सकता है।

इस बीच, आरोपी पक्ष पहले भी सभी आरोपों से इनकार करता रहा है और दावा करता है कि सभी लेन-देन बैंकिंग नियमों और व्यावसायिक समझौतों के तहत किए गए थे। हालांकि जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, फंड ट्रेल और कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही हैं।

फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी अन्य संपत्तियों, निवेशों और संभावित विदेशी होल्डिंग्स की भी जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस केस में और संपत्तियों की पहचान और अटैचमेंट हो सकती है।

यह मामला एक बार फिर बड़े कॉर्पोरेट बैंक फ्रॉड और फंड डायवर्जन की गंभीरता को उजागर करता है, साथ ही यह भी दिखाता है कि जांच एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संपत्ति ट्रेसिंग और जब्ती की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

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