हरियाणा के पानीपत में सोशल मीडिया के जरिए व्यापार का झांसा देकर धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। लेडीज सूट्स के ऑनलाइन प्रमोशन और कथित फर्जी फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए एक महिला कारोबारी पर ₹8 लाख की ठगी और ब्लैकमेलिंग के आरोप लगे हैं। पुलिस ने सेक्टर-23 स्थित ‘परी रानी सूट्स’ की मालकिन रानी गाहल्याण के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता अंजू रानी, जो चरखी दादरी की रहने वाली हैं, ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रानी गाहल्याण ने अपने ब्रांड को बेहद आकर्षक तरीके से पेश किया और फर्जी फैक्ट्री, उच्च गुणवत्ता वाले सूट और भारी मुनाफे का दावा किया। इसी झांसे में आकर शिकायतकर्ता ने उनसे संपर्क किया।
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जानकारी के अनुसार, आरोपी ने फ्रेंचाइजी देने के नाम पर निवेश का प्रस्ताव रखा और दावा किया कि कई लोग पहले ही उनके साथ जुड़कर लाखों रुपये कमा रहे हैं। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेज भी दिखाए गए, जिससे शिकायतकर्ता प्रभावित हो गईं।
आरोप है कि फ्रेंचाइजी सिक्योरिटी के नाम पर कुल ₹8 लाख की मांग की गई, लेकिन बैंक ट्रांसफर या चेक लेने से इनकार करते हुए केवल कैश भुगतान पर जोर दिया गया। शिकायत के मुताबिक, 2 फरवरी को ₹3 लाख, 17 फरवरी को ₹1.50 लाख और बाद में ₹3.50 लाख नकद दिए गए। यह भुगतान पानीपत कोर्ट परिसर में भी किया गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब एग्रीमेंट तैयार किया गया, तो उसमें वास्तविक ₹8 लाख के बजाय केवल ₹5 लाख का उल्लेख किया गया। जब इस पर आपत्ति जताई गई, तो आरोपी ने इसे “टैक्स बचाने की प्रक्रिया” बताकर मामला टाल दिया।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि बाद में जब फ्रेंचाइजी कारोबार शुरू हुआ, तो स्थिति पूरी तरह बदल गई। आरोप है कि न तो पक्का GST बिल दिया गया और न ही वादे के अनुसार व्यापारिक सहयोग मिला। इसके बजाय कथित रूप से दुर्व्यवहार और गाली-गलौज की स्थिति उत्पन्न हुई।
बाजार मूल्य की जांच करने पर सामने आया कि दिए गए सूट्स की कीमत बाजार से लगभग दो से तीन गुना अधिक थी। इसके अलावा, लगभग ₹15 लाख के स्टॉक में कई सूट खराब, कटे-फटे और घटिया क्वालिटी के पाए गए। इससे शिकायतकर्ता का व्यापार शुरू होने से पहले ही ठप हो गया।
मामले के उजागर होने के बाद थाना चांदनी बाग पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए फ्रेंचाइजी और निवेश का लालच देकर धोखाधड़ी की शिकायत मिली है और पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में वित्तीय लेनदेन, एग्रीमेंट दस्तावेज और डिजिटल प्रमोशन की भूमिका की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह केवल एक व्यक्तिगत मामला है या इसके पीछे कोई संगठित व्यापारिक धोखाधड़ी का नेटवर्क काम कर रहा है।
पुलिस का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से बढ़ रहे ऐसे मामलों में लोगों को बिना सत्यापन के किसी भी निवेश या फ्रेंचाइजी प्रस्ताव से बचना चाहिए, खासकर जब कैश लेनदेन पर जोर दिया जाए और दस्तावेजों में अस्पष्टता हो।
फिलहाल आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग के तहत केस दर्ज है और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी और आवश्यक गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जा सकती है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया के जरिए बन रही चमक-दमक वाली बिजनेस इमेज कई बार असलियत से काफी अलग होती है, और बिना जांच-पड़ताल के किए गए निवेश आम लोगों के लिए भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।
