नई मोटरसाइकिल खरीदने के बाद लगातार तकनीकी खराबी से परेशान एक उपभोक्ता को राहत देते हुए बेंगलुरु के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वाहन निर्माता और उसके अधिकृत डीलर को बाइक की कीमत का अधिकांश हिस्सा लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि वाहन में मौजूद गंभीर तकनीकी समस्या को बार-बार शिकायतों और कई मरम्मत प्रयासों के बावजूद दूर नहीं किया जा सका, जिससे उपभोक्ता को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा।
मामला बेंगलुरु के उत्तरहल्ली निवासी गणेश जे से जुड़ा है, जिन्होंने 1 जुलाई 2024 को एक अधिकृत डीलर से Hero Xtreme 125R मोटरसाइकिल खरीदी थी। वाहन की कुल कीमत ₹98,709 थी। शिकायत के अनुसार, खरीद के कुछ ही दिनों बाद बाइक का इंजन चलते-चलते अचानक बंद होने लगा। यह समस्या सामान्य तकनीकी खराबी से कहीं अधिक गंभीर थी क्योंकि वाहन सड़क पर चलते समय बंद हो जाता था, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी।
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गणेश जे ने शुरुआत में डीलरशिप से संपर्क किया और बाद में ई-मेल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद वाहन को बार-बार सर्विस सेंटर ले जाया गया। रिकॉर्ड के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 10 से अधिक बार सर्विस सेंटर का रुख किया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
मरम्मत के दौरान बाइक के कई महत्वपूर्ण पुर्जे बदले गए। इनमें थ्रॉटल बॉडी, क्लच प्लेट, क्लच एडॉप्टर स्विच, क्लच लीवर, संपूर्ण वायरिंग किट, की-सेट, फ्यूल पंप, फ्यूल इंजेक्टर और एयर फिल्टर शामिल थे। थ्रॉटल बॉडी को तो दो बार बदला गया। एक बार विशेष रूप से कंपनी के हरियाणा स्थित मुख्यालय से नया यूनिट मंगाया गया था। कंपनी के अनुसंधान एवं विकास विभाग के प्रतिनिधि ने भी वाहन का निरीक्षण किया, लेकिन इसके बावजूद समस्या समाप्त नहीं हुई।
शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय उपभोक्ता मंच के पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई। आरोप था कि इस शिकायत पर भी संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने वाहन की खराबी से संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग भी आयोग के समक्ष प्रस्तुत की।
दूसरी ओर, वाहन निर्माता और डीलर ने आयोग के समक्ष दावा किया कि संयुक्त परीक्षण के दौरान कथित खराबी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दी। उनका कहना था कि वारंटी की शर्तों में वाहन बदलने या पूरी राशि वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है। कंपनी की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि केवल वारंटी के आधार पर कोई उपभोक्ता वाहन प्रतिस्थापन या रिफंड का अधिकार नहीं मांग सकता।
हालांकि आयोग ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान आयोग ने विशेष रूप से उस तथ्य पर ध्यान दिया कि विपक्षी पक्ष द्वारा दाखिल हलफनामे में स्वयं यह स्वीकार किया गया था कि लगभग 40 किलोमीटर के परीक्षण के दौरान वाहन दो बार बंद हुआ था। आयोग ने माना कि यह स्वीकारोक्ति वाहन में अंतर्निहित दोष की ओर संकेत करती है।
आदेश में कहा गया कि यदि 40 किलोमीटर की यात्रा में दो बार इंजन बंद हुआ, तो वाहन के कुल उपयोग के दौरान ऐसी घटनाएं बड़ी संख्या में हुई होंगी। आयोग ने इसे निर्माण संबंधी दोष के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा और कहा कि जब ऐसा स्पष्ट स्वीकारोक्ति रिकॉर्ड पर मौजूद है, तब अतिरिक्त विशेषज्ञ राय की आवश्यकता नहीं रह जाती।
आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि कई महत्वपूर्ण पुर्जे बदलने और बार-बार सर्विसिंग के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता को अपेक्षित गुणवत्ता और भरोसेमंद सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसी आधार पर आयोग ने वाहन निर्माता और अधिकृत डीलर को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया। आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता को वाहन वापस करने पर ₹88,000 की राशि लौटाई जाएगी। यह रकम मूल खरीद मूल्य में से 10 प्रतिशत मूल्यह्रास घटाने के बाद निर्धारित की गई है। इसके अलावा ₹2,000 मुकदमा खर्च के रूप में भी देने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने संबंधित पक्षों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आदेश का पालन कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है।
यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो वाहन में बार-बार आने वाली तकनीकी समस्याओं और लंबे समय तक अनसुलझी शिकायतों के कारण न्याय की मांग करते हैं।
