सीबीआई ने ₹7,623 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में रिलायंस समूह की दो वित्तीय कंपनियों के पूर्व शीर्ष अधिकारियों को गिरफ्तार किया है।

₹48 लाख की रहस्यमयी बैंकिंग ट्रांजैक्शनों से हड़कंप: युवक के खाते से करोड़ों जैसी गतिविधि का दावा, रिश्तेदार पर गंभीर आरोप

Team The420
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक बैंक खाते से लगभग ₹48 लाख के कथित लेनदेन और संभावित दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद साइबर अपराध जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। कौंधियारा थाना क्षेत्र के बड़गोहना खुर्द गांव निवासी एक युवक ने आरोप लगाया है कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल उसकी जानकारी और अनुमति के बिना किया गया तथा खाते के माध्यम से बड़ी रकम का लेनदेन हुआ। मामले में पीड़ित ने अपने ही एक रिश्तेदार के खिलाफ नामजद शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित नीरज कुमार का कहना है कि करीब एक वर्ष पहले उसके रिश्तेदार रजोल पुत्र हिंछलाल के कहने पर उसका बैंक खाता उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक की नैनी स्थित एडीए शाखा में खुलवाया गया था। उस समय उसे किसी भी प्रकार की अनियमितता या संभावित जोखिम की जानकारी नहीं थी। उसके अनुसार, खाता सामान्य बैंकिंग उपयोग के उद्देश्य से खुलवाया गया था और उसे यह अंदाजा नहीं था कि भविष्य में यह किसी जांच का विषय बन सकता है।

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मामले ने उस समय अचानक नया मोड़ ले लिया जब साइबर सेल की एक टीम नीरज कुमार के घर पहुंची और उसके बैंक खाते से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ शुरू की। अधिकारियों के सवालों ने पीड़ित को हैरान कर दिया। पूछताछ के बाद उसने स्वयं बैंक जाकर अपने खाते का विस्तृत विवरण निकलवाया, जहां कथित तौर पर सामने आया कि खाते में लगभग ₹48 लाख के लेनदेन दर्ज हैं।

नीरज कुमार का दावा है कि इन लेनदेन के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी और न ही उसने इतनी बड़ी रकम का संचालन किया। उसका आरोप है कि किसी अन्य व्यक्ति ने उसके खाते का इस्तेमाल किया और खाते के माध्यम से भारी वित्तीय गतिविधियां संचालित कीं। पीड़ित का कहना है कि जब उसे इस कथित हेराफेरी की जानकारी मिली तो वह मानसिक रूप से परेशान हो गया और उसे अपने खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई का भी डर सताने लगा।

जांच से जुड़े घटनाक्रम के दौरान सोनभद्र जिले की पुलिस और साइबर सेल की टीम भी पीड़ित के घर पहुंची। अधिकारियों ने उससे पूछताछ की और मामले से संबंधित नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा। पीड़ित के अनुसार, संबंधित मामले में सोनभद्र के साइबर थाने में मुकदमा दर्ज है और उसी के तहत विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि खाते में दर्ज लेनदेन का वास्तविक स्रोत क्या था, धनराशि किन खातों से आई और आगे कहां भेजी गई। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या खाते का उपयोग किसी साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी या संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि में किया गया था। बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि पूरा घटनाक्रम उसके रिश्तेदार की जानकारी और भूमिका के बिना संभव नहीं था। इसी आधार पर उसने कौंधियारा थाने में नामजद तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और मामले की पड़ताल जारी है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में वृद्धि हुई है, जहां लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कथित रूप से मनी म्यूल अकाउंट के रूप में किया जाता है। कई बार खाताधारक स्वयं पूरी गतिविधि से अनजान होने का दावा करते हैं, जबकि अपराधी उनके खाते का उपयोग धन के हस्तांतरण और लेयरिंग के लिए करते हैं। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अक्सर भरोसेमंद रिश्तों, लालच या झूठे आश्वासनों का इस्तेमाल कर बैंक खातों तक पहुंच हासिल करते हैं और बाद में उन्हीं खातों को अवैध वित्तीय लेनदेन के लिए प्रयोग करते हैं।

फिलहाल पुलिस, साइबर सेल और बैंकिंग संस्थान संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खाते में हुए कथित ₹48 लाख के लेनदेन के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और इसमें किसकी भूमिका थी। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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