Anthropic और ट्रंप प्रशासन के बीच AI ब्लैकलिस्टिंग विवाद अदालत पहुंचा, कंपनी ने सैन्य उपयोग से जुड़े सुरक्षा उपाय हटाने से इनकार पर कार्रवाई का आरोप लगाया

Anthropic पर कार्रवाई को लेकर ट्रंप प्रशासन और AI कंपनी आमने-सामने: अदालत में पहुंचा ‘ब्लैकलिस्टिंग’ विवाद

Team The420
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वॉशिंगटन। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उद्योग और अमेरिकी सरकार के बीच टकराव का एक महत्वपूर्ण मामला अब अदालत में पहुंच गया है। AI कंपनी Anthropic और ट्रंप प्रशासन के बीच चल रहे विवाद में अमेरिकी सरकार ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों के माध्यम से यह दावा किया है कि कंपनी के खिलाफ उठाए गए कदम किसी प्रकार की अवैध प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं थे, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा आवश्यकताओं से जुड़े निर्णयों का हिस्सा थे।

यह मामला तब शुरू हुआ जब Anthropic ने मार्च 2026 में संघीय अदालत में मुकदमा दायर कर आरोप लगाया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कंपनी को उसके विचारों और नीतिगत रुख के कारण सरकारी उपयोग से बाहर करने का प्रयास किया। कंपनी का दावा है कि उसे कथित रूप से “ब्लैकलिस्ट” किया गया, जिससे उसके संवैधानिक अधिकारों, विशेष रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उचित कानूनी प्रक्रिया के अधिकार का उल्लंघन हुआ।

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नवीनतम अदालती दस्तावेजों में अमेरिकी न्याय विभाग ने इन आरोपों का खंडन किया है। सरकार ने कहा कि मामला न्यायिक समीक्षा के योग्य नहीं है क्योंकि कंपनी किसी “अंतिम एजेंसी कार्रवाई” को चुनौती नहीं दे रही है। न्याय विभाग के अनुसार, वर्तमान विवाद प्रशासनिक प्रक्रिया के उस चरण में नहीं पहुंचा है जहां अदालत हस्तक्षेप कर सके।

विवाद की जड़ Anthropic के लोकप्रिय AI चैटबॉट Claude के सैन्य उपयोग को लेकर सामने आई है। अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, रक्षा विभाग और कंपनी के बीच मतभेद तब बढ़ गए जब Pentagon ने AI तकनीक के कुछ सैन्य उपयोगों के लिए सुरक्षा प्रतिबंधों में ढील देने की मांग की। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के मद्देनजर यह आवश्यक था, जबकि Anthropic ने कथित रूप से अपने सुरक्षा मानकों और नैतिक दिशा-निर्देशों को बदलने से इनकार कर दिया।

मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, Anthropic ने ऐसे सुरक्षा उपाय बनाए रखे थे जो उसके AI मॉडल को स्वायत्त हथियार प्रणालियों और घरेलू निगरानी जैसे संवेदनशील कार्यों में उपयोग किए जाने से रोकते थे। कंपनी का दावा है कि इन्हीं सुरक्षा सीमाओं को हटाने से इनकार करने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई।

इसके बाद Pentagon ने Anthropic को औपचारिक सप्लाई-चेन जोखिम श्रेणी में डाल दिया, जिसके परिणामस्वरूप कई सरकारी एजेंसियों द्वारा कंपनी की तकनीक के उपयोग पर प्रतिबंध या सीमाएं लगा दी गईं। बताया गया कि कंपनी की AI तकनीक का उपयोग कुछ सैन्य अभियानों में भी किया जा रहा था, जिससे यह विवाद और अधिक संवेदनशील बन गया।

मार्च में सैन फ्रांसिस्को की एक संघीय अदालत ने Pentagon द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर अस्थायी रोक लगा दी थी। हालांकि अंतिम फैसला अभी आना बाकी है और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रख रहे हैं।

यह मामला केवल एक कंपनी और सरकार के बीच का विवाद नहीं माना जा रहा, बल्कि AI उद्योग के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का फैसला यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है कि AI तकनीक के उपयोग पर अंतिम नियंत्रण किसके पास होगा—सरकार के पास या तकनीक विकसित करने वाली निजी कंपनियों के पास।

विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब Anthropic ने हाल ही में अमेरिका में प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए गोपनीय आवेदन भी दाखिल किया है। दूसरी ओर कंपनी ने वॉशिंगटन डी.सी. में एक अलग मुकदमा भी दायर कर रखा है, जिसमें Pentagon की एक अन्य जोखिम श्रेणी निर्धारण प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। उस मामले का असर भविष्य में कंपनी के नागरिक सरकारी अनुबंधों पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानूनी लड़ाई का असर केवल Anthropic तक सीमित नहीं रहेगा। अदालत का अंतिम निर्णय अमेरिकी AI नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तकनीकी मानकों और सरकारी एजेंसियों तथा निजी AI कंपनियों के बीच शक्ति संतुलन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। फिलहाल उद्योग जगत और निवेशकों की नजर इस बहुचर्चित मुकदमे के अगले चरण पर टिकी हुई है।

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