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टेंडर घोटाले पर बड़ा एक्शन: 5 निर्माण कंपनियां 10 साल के लिए ब्लैकलिस्ट, फर्जी दस्तावेजों से खुला नेटवर्क

Team The420
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Bihar में टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के खुलासे के बाद ग्रामीण कार्य विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए पांच निर्माण कंपनियों को 10 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। जांच में सामने आया कि इन कंपनियों ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र, भ्रामक दस्तावेज और अनुबंध शर्तों के उल्लंघन के जरिए सरकारी निर्माण कार्य हासिल करने की कोशिश की थी।

विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कई एजेंसियों ने अनुभव संबंधी दस्तावेजों में हेरफेर किया और परियोजनाओं की वास्तविक क्षमता को छिपाकर ठेके हासिल किए। मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता मानते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की।

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सूत्रों के अनुसार, सीवान और वैशाली जिलों से जुड़ी दो प्रमुख कंपनियों पर सबसे पहले संदेह जताया गया था। जांच के दौरान पाया गया कि इन फर्मों द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुभव प्रमाण पत्र पूरी तरह से असत्य थे। जब विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा, तो कंपनियों की ओर से दिए गए जवाब असंतोषजनक पाए गए और उन्हें खारिज कर दिया गया।

इसके अलावा, भागलपुर के सन्हौला क्षेत्र और कटिहार जिले की कुछ निर्माण एजेंसियों पर भी गंभीर आरोप साबित हुए। इन पर गलत दस्तावेजों के आधार पर टेंडर प्राप्त करने और बाद में काम में लापरवाही बरतने के आरोप लगे। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं की गईं, जिससे सरकारी योजनाओं की प्रगति प्रभावित हुई।

सारण और पूर्णिया जिलों की कुछ अन्य एजेंसियों को अनुबंध शर्तों का पालन न करने, परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा न करने और निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ कंपनियों ने अपनी जिम्मेदारी कंप्यूटर ऑपरेटर या तकनीकी स्टाफ पर डालकर बचने की कोशिश की, जबकि एक फर्म ने बीमारी और तकनीकी त्रुटि का बहाना बनाया। विभाग ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जिम्मेदारी सीधे संवेदक की होती है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य टेंडर प्रणाली में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। सरकार चाहती है कि विकास परियोजनाएं वास्तविक और सक्षम एजेंसियों द्वारा ही पूरी की जाएं ताकि जनता को समय पर लाभ मिल सके।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में टेंडर प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा, जिससे फर्जी दस्तावेजों की संभावना कम हो सके। साथ ही, एजेंसियों की पृष्ठभूमि और कार्यक्षमता की गहन जांच के बाद ही उन्हें परियोजनाएं आवंटित की जाएंगी।

इस पूरे मामले के बाद प्रशासन ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की धोखाधड़ी या अनियमितता पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों को भविष्य में किसी भी सरकारी टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।

कुल मिलाकर, इस कार्रवाई को Bihar में टेंडर प्रणाली को मजबूत करने और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि इस तरह की सख्ती से न केवल व्यवस्था में सुधार होगा बल्कि विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी और सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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