आइजोल। चुनाव आयोग ने मिजोरम में चल रहे मतदाता सूची संशोधन अभियान के दौरान अवैध प्रवासियों और फर्जी प्रविष्टियों के खिलाफ विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि राज्य की लंबी और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को देखते हुए मतदाता सूची का शुद्धिकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
यह निर्देश सोमवार को आइजोल में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए, जहां चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान की प्रगति का आकलन किया। यह अभियान मतदाता सूची को अद्यतन करने तथा केवल पात्र नागरिकों को ही मतदाता सूची में शामिल करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
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बैठक में चुनाव अधिकारियों ने अब तक की प्रगति की समीक्षा की और आगामी चरणों की रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, बूथ स्तर अधिकारियों तथा अन्य संबंधित कर्मचारियों ने भाग लिया।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की तैयारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है क्योंकि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की नींव इसी पर आधारित होती है। अधिकारियों से कहा गया कि वे आवेदन पत्रों, दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों की जांच अत्यधिक सावधानी के साथ करें, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित हैं।
मिजोरम की सीमाएं बांग्लादेश और म्यांमार से लगती हैं, जिसके कारण राज्य में मतदाता सत्यापन का कार्य और अधिक संवेदनशील माना जाता है। सीमा पार से होने वाली आवाजाही और समय-समय पर सामने आने वाली अवैध प्रवासन संबंधी चिंताओं को देखते हुए आयोग ने अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
बैठक के दौरान अधिकारियों को संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए। आयोग ने दोहराया कि प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो।
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के अंतर्गत घर-घर जाकर सत्यापन, दस्तावेजों की जांच, मतदाता विवरणों में आवश्यक सुधार तथा डुप्लीकेट या संदिग्ध प्रविष्टियों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों को बताया गया कि इस प्रक्रिया में छोटी सी चूक भी भविष्य में चुनावी पारदर्शिता और जनविश्वास को प्रभावित कर सकती है।
समीक्षा बैठक में जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बूथ स्तर अधिकारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि वे चुनाव प्रशासन और मतदाताओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए उन्हें आवश्यक सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
चुनाव अधिकारियों ने यह भी कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूचियों की शुद्धता को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चुनावी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि मतदाता डेटाबेस सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित हो।
बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों को क्षेत्रीय निरीक्षण बढ़ाने, नियमित निगरानी करने और संशोधन अभियान के दौरान आने वाली चुनौतियों का समय रहते समाधान करने के निर्देश दिए गए। आयोग का मानना है कि सक्रिय निगरानी और प्रभावी समन्वय से इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने दोहराया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता काफी हद तक मतदाता सूचियों की शुद्धता पर निर्भर करती है। इसलिए मतदाता सूची संशोधन का कार्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राज्य में चल रहा यह विशेष अभियान आने वाले सप्ताहों तक जारी रहेगा। इस दौरान विभिन्न जिलों में व्यापक सत्यापन और डेटा जांच की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आयोग को उम्मीद है कि इस अभियान के पूरा होने के बाद मिजोरम की मतदाता सूची अधिक सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय रूप में सामने आएगी।
चुनाव आयोग द्वारा सतर्कता, पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों के पालन पर दिए गए विशेष जोर के बीच मिजोरम में मतदाता सूची संशोधन की पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक निगरानी में जारी रहेगी और अंतिम सूची प्रकाशित होने तक इस पर करीबी नजर रखी जाएगी।
