कोलकाता में कारोबारी Joy Kamdar और उनके भाई के खिलाफ संपत्ति प्रोजेक्ट में 25% मुनाफे के कथित वादे को लेकर नई FIR दर्ज की गई है।

बच्चों के भोजन योजना में ₹36 करोड़ की कथित हेराफेरी, FBI की मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स सूची में शामिल हुआ कारोबारी

Team The420
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अमेरिका में कोविड-19 महामारी के दौरान बच्चों के लिए संचालित पोषण सहायता कार्यक्रम से जुड़ी कथित करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। संघीय जांच एजेंसी FBI ने हाल ही में अपनी नई “मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स” सूची जारी की है, जिसमें मिनेसोटा के कारोबारी सईद अब्दुल्लाही एरेग का नाम प्रमुख रूप से शामिल किया गया है। एरेग पर आरोप है कि उसने महामारी के दौरान बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई सरकारी योजना का दुरुपयोग कर 4.2 मिलियन डॉलर (करीब ₹36 करोड़) से अधिक की राशि हासिल की।

जांच एजेंसियों के अनुसार, एरेग दक्षिण मिनियापोलिस में एक किराना स्टोर और डेली व्यवसाय का संचालन करता था। आरोप है कि अप्रैल 2020 से अप्रैल 2021 के बीच उसके व्यवसाय ने सरकारी पोषण कार्यक्रम के तहत ऐसे दावे प्रस्तुत किए, जिनमें कहा गया कि बच्चों को 14 लाख से अधिक भोजन वितरित किए गए। हालांकि जांचकर्ताओं का कहना है कि यह आंकड़ा वास्तविक गतिविधियों से मेल नहीं खाता और कथित तौर पर फर्जी दावों के आधार पर सरकारी भुगतान प्राप्त किए गए।

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संघीय अभियोजकों के मुताबिक, कोविड महामारी के दौरान स्कूलों के बंद होने से प्रभावित बच्चों तक भोजन पहुंचाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम शुरू किया गया था। सरकार ने जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि उपलब्ध कराई थी, लेकिन आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर करोड़ों डॉलर की धोखाधड़ी की गई।

जांच में दावा किया गया है कि एरेग के व्यवसाय ने भोजन वितरण से जुड़े दस्तावेजों और आंकड़ों के माध्यम से भारी संख्या में भोजन परोसने का दावा किया, जिसके आधार पर सरकारी भुगतान स्वीकृत हुए। बाद में जब रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच की गई तो कथित अनियमितताओं के संकेत मिले। इसके बाद मामले ने संघीय स्तर की जांच का रूप ले लिया।

अधिकारियों का आरोप है कि प्राप्त धनराशि का बड़ा हिस्सा उन उद्देश्यों पर खर्च नहीं किया गया, जिनके लिए कार्यक्रम बनाया गया था। जांचकर्ताओं का कहना है कि करोड़ों रुपये के बराबर धन का उपयोग परिवार की आलीशान जीवनशैली को बनाए रखने, निजी खर्चों और अन्य वित्तीय गतिविधियों में किया गया। इसके अलावा कुछ राशि विदेशी खातों में स्थानांतरित किए जाने के भी आरोप हैं। जांच एजेंसियां इन लेनदेन की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं।

यह मामला मिनेसोटा में महामारी कालीन राहत योजनाओं से जुड़े व्यापक कथित वित्तीय घोटालों की जांच का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी जांच एजेंसियों का मानना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में शुरू की गई कई राहत योजनाएं धोखाधड़ी करने वाले समूहों के निशाने पर आ गई थीं। तेज़ी से सहायता पहुंचाने की आवश्यकता के कारण कई कार्यक्रमों में बाद में सत्यापन और निगरानी की चुनौतियां सामने आईं।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों, गलत विवरणों और वित्तीय रिकॉर्ड के जरिए भुगतान हासिल करने की योजना किस प्रकार संचालित की गई। अधिकारियों के अनुसार, भोजन वितरण रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, व्यवसायिक गतिविधियों और धन के प्रवाह से जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है।

FBI द्वारा शुरू की गई “मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स” सूची का उद्देश्य बड़े वित्तीय अपराधों के आरोपियों के बारे में जनता को जानकारी देना और जांच में सहयोग प्राप्त करना है। एजेंसी का मानना है कि सार्वजनिक धन से जुड़े बड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में धोखाधड़ी करने वाले अपराधी अक्सर वैध प्रक्रियाओं का आभास पैदा कर लोगों और संस्थाओं का भरोसा जीतते हैं। उनके अनुसार, फर्जी दस्तावेज, बनावटी रिकॉर्ड और जटिल वित्तीय लेनदेन ऐसे मामलों की सामान्य विशेषताएं होती हैं।

मामले की जांच अभी जारी है और संघीय एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। एरेग का नाम FBI की मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स सूची में शामिल होने के बाद इस मामले पर राष्ट्रीय स्तर पर फिर से ध्यान केंद्रित हो गया है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि बढ़ी हुई सार्वजनिक जागरूकता और निगरानी से मामले की आगे की कार्रवाई को मजबूती मिलेगी तथा सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सकेगा।

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