चंडीगढ़। हरियाणा में ₹593 करोड़ के कथित बैंक घोटाले की जांच के बीच एक सनसनीखेज घटनाक्रम सामने आया है, जहां राज्य सरकार से जुड़े एक अकाउंट्स ऑफिसर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर अधिकारी ने हरियाणा सचिवालय की आठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि चल रही जांच की दिशा और दायरे को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक की पहचान बलवंत सिंह के रूप में हुई है, जो हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) में अकाउंट्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। वह पंचकूला स्थित कार्यालय में तैनात थे और घटना वाले दिन सुबह चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सचिवालय पहुंचे थे। अधिकारियों के मुताबिक, उनके पास एक विजिटर पास जारी किया गया था, जिसके माध्यम से उन्होंने कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स कार्यालय में प्रवेश किया था।
सूत्रों के अनुसार, बलवंत सिंह को उसी दिन केंद्रीय एजेंसी के समक्ष पेश होना था। उन्हें ₹593 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जो सरकारी फंड से जुड़ा मामला बताया जा रहा है। इस घोटाले में फर्जी लेनदेन, अकाउंटिंग गड़बड़ियों और धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है, जिसकी जांच कई स्तरों पर जारी है।
घटना दोपहर करीब 3:30 बजे की बताई जा रही है, जब सचिवालय परिसर में अचानक अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिकारी ने ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
इस मामले में एक अहम पहलू यह भी सामने आया है कि घटना से कुछ घंटे पहले ही HPGCL के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) को कथित रूप से इसी घोटाले में संलिप्तता के आरोप में पद से हटा दिया गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच का दायरा व्यापक है और कई अधिकारी इसके घेरे में आ सकते हैं।
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जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को कई पहलुओं से खंगाला जा रहा है। एक ओर जहां ₹593 करोड़ के कथित घोटाले में वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और बैंकिंग ट्रेल की जांच की जा रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी की मौत के पीछे की परिस्थितियों को भी विस्तार से परखा जा रहा है। सचिवालय में उनकी गतिविधियों, आवाजाही और घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में जांच का दबाव और मानसिक तनाव कई बार गंभीर परिणामों का कारण बन सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और वित्तीय ट्रांजैक्शन इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
₹593 करोड़ के इस कथित घोटाले को लेकर पहले से ही गहन जांच चल रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी राशि का दुरुपयोग कैसे हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। संबंधित दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ बैंक खातों और ट्रांजैक्शन का विश्लेषण भी किया जा रहा है।
यह घटना सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है। साथ ही यह भी संकेत देती है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में निगरानी और नियंत्रण तंत्र को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
