नोएडा। शेयर बाजार में मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों द्वारा ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जहां सेक्टर 104 में रहने वाले 71 वर्षीय एक रिटायर्ड टेलीकॉम इंजीनियर से करीब ₹75 लाख की ठगी कर ली गई। यह पूरा खेल व्हाट्सऐप के जरिए शुरू हुआ और एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंजाम दिया गया।
पीड़ित के अनुसार, 25 फरवरी को उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति की ओर से व्हाट्सऐप मैसेज मिला, जिसमें उन्हें एक ट्रेडिंग ग्रुप से जुड़ने का निमंत्रण दिया गया। संदेश में दावा किया गया कि यह ग्रुप भारतीय शेयर बाजार (NSE) और अमेरिकी बाजार NASDAQ में विदेशी संस्थागत निवेश (FII) के तहत ट्रेडिंग करता है और तकनीकी विश्लेषण तथा IPO निवेश के जरिए सुनिश्चित मुनाफा दिलाता है।
जांच में सामने आया कि ग्रुप में शामिल होने के बाद पीड़ित को नियमित रूप से स्टॉक टिप्स, निवेश रणनीतियां और मुनाफे के स्क्रीनशॉट भेजे जाते थे। इससे धीरे-धीरे उनका भरोसा बढ़ा। इसके बाद उन्हें एक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए निवेश करने के लिए कहा गया, जो देखने में एक वास्तविक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसा प्रतीत होता था।
शुरुआत में पीड़ित ने एक छोटी राशि निवेश की और कुछ समय बाद ₹8,000 का मुनाफा सफलतापूर्वक निकाल भी लिया। यही वह बिंदु था जहां ठगों ने विश्वास की नींव मजबूत कर दी। इसके बाद उन्हें लगातार अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
25 फरवरी से 3 मार्च के बीच पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजैक्शनों के जरिए कुल ₹75 लाख तक की रकम निवेश कर दी। इस दौरान उन्हें प्लेटफॉर्म पर मुनाफा दिखाया जाता रहा, जिससे उन्हें यह विश्वास बना रहा कि उनका पैसा सुरक्षित है और बढ़ रहा है।
हालांकि, जब पीड़ित ने बड़ी राशि निकालने की कोशिश की, तो उनका ट्रेडिंग अकाउंट अचानक ब्लॉक कर दिया गया। इसके साथ ही उन्हें और पैसा निवेश करने का दबाव बनाया गया और यहां तक कि ‘लीगल एक्शन’ की धमकी भी दी गई। इसी बिंदु पर उन्हें शक हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं।
इसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। जांच एजेंसियों ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और बैंक खातों तथा डिजिटल ट्रेल की जांच शुरू कर दी गई है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह मामला साइबर ठगों के एक सुनियोजित मॉड्यूल को दर्शाता है, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फर्जी ऐप और मनोवैज्ञानिक दबाव का संयोजन इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह के मामलों में पहले छोटे मुनाफे दिखाकर विश्वास जीता जाता है और फिर बड़ी रकम ठगी जाती है।
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साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि इस तरह के फ्रॉड में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की अहम भूमिका होती है। उन्होंने बताया, “ठग पहले निवेशक के भरोसे को मजबूत करते हैं, फिर उसे धीरे-धीरे बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। जब निवेशक पूरी तरह फंस जाता है, तब वे निकासी रोककर और पैसे की मांग करते हैं।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी अनजान व्हाट्सऐप ग्रुप, ट्रेडिंग ऐप या निवेश स्कीम पर आंख बंद कर भरोसा करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की वैधता की जांच करना और केवल अधिकृत एवं पंजीकृत माध्यमों का ही उपयोग करना चाहिए।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि किसी निवेश प्लेटफॉर्म पर असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का वादा किया जा रहा हो, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए।
फिलहाल पुलिस इस मामले में शामिल आरोपियों की पहचान करने और नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य लोगों को भी इसी तरह निशाना बनाया है।
अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव या ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और ऐसे साइबर अपराधों पर रोक लगाई जा सके।
