70वें स्थापना दिवस पर रिपोर्ट कार्ड जारी; ₹63,142 करोड़ पीड़ितों को लौटाए, भगोड़े अपराधियों पर भी कड़ी कार्रवाई

“₹81,422 करोड़ की संपत्तियों पर ईडी का शिकंजा: आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई, 94% तक पहुंची दोष सिद्धि दर”

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By Roopa
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नई दिल्ली। आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए Enforcement Directorate (ईडी) ने पिछले वित्त वर्ष में ₹81,422 करोड़ की संपत्तियां जब्त करने का दावा किया है। एजेंसी द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जब्त की गई राशि में से ₹63,142 करोड़ बैंकों, निवेशकों और घर खरीदारों को वापस दिलाए जा चुके हैं। यह आंकड़ा न केवल कार्रवाई के पैमाने को दर्शाता है, बल्कि वित्तीय अपराधों के खिलाफ बढ़ती सख्ती का भी संकेत देता है।

ईडी ने अपने 70वें स्थापना दिवस पर जारी रिपोर्ट में बताया कि जांच की गुणवत्ता और मनी ट्रेल ट्रैकिंग की क्षमता में सुधार के चलते अब अपराधियों तक पहुंचना पहले के मुकाबले अधिक प्रभावी हो गया है। एजेंसी के अनुसार, जटिल वित्तीय नेटवर्क के बावजूद धन के स्रोत और उसके प्रवाह को ट्रैक कर आरोपियों तक पहुंचने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एजेंसी की दोष सिद्धि दर बढ़कर 94% तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि, इसके बावजूद बड़ी संख्या में मामले अब भी अदालतों में लंबित हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2,400 से अधिक मामले विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। वहीं, 31 मार्च तक केवल लगभग 60 मामलों का ही अंतिम निपटारा हो सका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायिक प्रक्रिया में समय लगना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

ईडी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी कार्रवाई अब केवल घरेलू अपराधों तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेश भाग चुके आर्थिक अपराधियों पर भी सख्ती से शिकंजा कसा जा रहा है। Fugitive Economic Offenders Act के तहत 31 मार्च 2026 तक कुल 54 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है, जिनमें से 21 को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है। इन मामलों में ₹2,178 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है, जो इस दिशा में एजेंसी की सक्रियता को दर्शाता है।

रिपोर्ट में उभरते हुए खतरों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पिछले सात महीनों में डिजिटल अरेस्ट, विदेशी हस्तक्षेप, राष्ट्रीय हित के खिलाफ गतिविधियों और बौद्धिक संपदा धोखाधड़ी जैसे मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग के लगभग 800 नए केस दर्ज किए गए हैं। यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (पीएमएलए) के तहत की गई है, जो ऐसे अपराधों से निपटने के लिए एक प्रमुख कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

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एजेंसी के अनुसार, इन मामलों की पहचान और जांच में नई जोखिम मूल्यांकन समिति की अहम भूमिका रही है। अक्टूबर 2025 से अब तक इस समिति की 91 बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें कुल 794 मामलों को दर्ज करने की मंजूरी दी गई। इससे यह संकेत मिलता है कि ईडी अब केवल पारंपरिक आर्थिक अपराधों तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते डिजिटल और वैश्विक खतरों के अनुरूप अपनी रणनीति को भी अपडेट कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईडी की बढ़ती सक्रियता से वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिला है। हालांकि, वे यह भी बताते हैं कि मामलों के निपटारे की धीमी गति एक चिंता का विषय है, जिसे दूर करने के लिए न्यायिक ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है।

वहीं, एजेंसी का यह भी कहना है कि भविष्य में तकनीकी साधनों और डेटा एनालिटिक्स का अधिक उपयोग कर जांच को और प्रभावी बनाया जाएगा। इससे न केवल अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सकेगा, बल्कि अवैध संपत्तियों की पहचान और जब्ती की प्रक्रिया भी तेज होगी।

कुल मिलाकर, ईडी की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि देश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई अब अधिक संगठित और परिणाममुखी हो रही है। बढ़ती जब्ती, उच्च दोष सिद्धि दर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई के संकेत यह बताते हैं कि एजेंसी आने वाले समय में और अधिक सख्ती के साथ ऐसे अपराधों पर नकेल कसने के लिए तैयार है।

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