छत्रपति संभाजीनगर। सीमित शैक्षणिक योग्यता के बावजूद करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम देने वाले एक आरोपी की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि साइबर और वित्तीय अपराध किस तरह संगठित और सुनियोजित तरीके से किए जा रहे हैं। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने पालघर से गुरु प्रसाद शंकर चव्हाण को गिरफ्तार किया है, जिस पर शेयर ट्रेडिंग के नाम पर सैकड़ों निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का आरोप है।
जांच में सामने आया है कि आरोपी केवल 12वीं तक शिक्षित है, लेकिन इसके बावजूद उसने बेहद योजनाबद्ध तरीके से निवेशकों को झांसे में लेकर एक बड़े स्तर पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने “पिमैक्स ग्लोबल” नाम की कंपनी का नेटवर्क खड़ा करने का दावा किया और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर का निवेश विशेषज्ञ बताकर लोगों का विश्वास जीता।
आरोपी और उसके सहयोगी राज्यभर में लग्जरी होटलों में सेमिनार आयोजित करते थे, जहां निवेशकों को हर महीने 10 से 12 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच दिया जाता था। फर्जी प्रेजेंटेशन और बनावटी मुनाफे के आंकड़ों के जरिए लोगों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनका पैसा सुरक्षित और तेजी से बढ़ेगा। खासतौर पर औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना बनाया गया, जिन्हें जल्दी और अधिक रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए तैयार किया गया।
इस पूरे मामले की शुरुआत एक महिला निवेशक की शिकायत से हुई, जिसमें बताया गया कि आरोपी ने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर करीब ₹2.1 करोड़ की ठगी की है। इसके बाद मामला दर्ज हुआ और जांच का दायरा बढ़ाया गया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह स्पष्ट होता गया कि यह कोई छोटा मामला नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है जिसमें कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दुबई और मॉरीशस में 13 कंपनियों के संचालन का दावा किया था। इन अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों का हवाला देकर निवेशकों को यह विश्वास दिलाया गया कि उनका पैसा विदेशी बाजारों में निवेश किया जा रहा है, जिससे उन्हें उच्च रिटर्न मिलेगा।
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मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया और उसने अपने सभी मोबाइल फोन बंद कर दिए। हालांकि, जांच टीम ने तकनीकी निगरानी के जरिए एक महत्वपूर्ण सुराग हासिल किया। पुलिस को पता चला कि आरोपी के बैंक खाते से जुड़ा एक मोबाइल नंबर बीच-बीच में इंटरनेट का उपयोग कर रहा था। इसी डिजिटल ट्रेल के आधार पर टीम ने उसकी लोकेशन ट्रैक की।
लगातार निगरानी के बाद पुलिस टीम पालघर पहुंची और स्थानीय सहयोग के साथ दो दिन तक जाल बिछाकर आरोपी को एक पॉश सोसाइटी के पास से गिरफ्तार कर लिया। बताया गया कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए किराए के बंगले में रह रहा था और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ठगी की रकम से आरोपी ने आलीशान जीवनशैली अपनाई थी। उसने विरार और ठाणे में तीन लग्जरी फ्लैट खरीदे थे और करीब ₹2 करोड़ की महंगी गाड़ियां भी खरीदी थीं।
इस मामले में आरोपी की पत्नी समेत कई अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है। कुछ सहयोगी पहले से जेल में हैं, जबकि अन्य की भूमिका की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क और किन राज्यों तक फैला हुआ है और क्या इसमें और लोग शामिल हैं।
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि उच्च रिटर्न के लालच में बिना सत्यापन किए निवेश करना कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से पहले कंपनी की वैधता और पंजीकरण की जांच करना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके।
फिलहाल, जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस बहुस्तरीय ठगी के और भी पहलू सामने आएंगे।
