कई कंपनियों के नाम पर टैक्स हेराफेरी; सिम कार्ड और फर्जी दस्तावेजों से चल रहा था संगठित रैकेट

“फर्जी फर्मों का जाल: GST चोरी के नेटवर्क का भंडाफोड़, पंजाब से दो आरोपी गिरफ्तार”

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By Roopa
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आजमगढ़। टैक्स चोरी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए पुलिस ने पंजाब से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी कंपनियां बनाकर GST से बचने और अवैध लेनदेन को अंजाम दे रहे थे। यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम द्वारा की गई, जिसमें तकनीकी और वित्तीय जांच के आधार पर पूरे गिरोह की परतें खुलनी शुरू हुई हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास कुमार, निवासी लुधियाना (पंजाब) और बलजीत सिंह, निवासी फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 7 जुलाई 2025 को हुई थी, जब GST विभाग की शिकायत के आधार पर थाना सिधारी में मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और फर्जी फर्मों के जरिए वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई थी।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई कंपनियां बनाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे थे। इनमें पंकज इंटरप्राइजेज, भोलानाथ इंटरप्राइजेज, शिवम ट्रेडर्स और वी.के. इंटरप्राइजेज जैसी फर्में शामिल हैं। इन कंपनियों के जरिए फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दुरुपयोग और लेनदेन को वैध दिखाने का खेल चल रहा था।

पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रैक की और पंजाब के गोबिंदगढ़ में दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद 29 अप्रैल 2026 को फतेहगढ़ साहिब की अदालत से ट्रांजिट रिमांड लिया गया और आरोपियों को आजमगढ़ लाया गया। यहां उन्हें न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

जांच में सामने आया कि विकास कुमार ने फर्जी कंपनियां खोलने के लिए अपने दस्तावेज उपलब्ध कराए, जिससे विभिन्न फर्मों का पंजीकरण कराया गया। वहीं, बलजीत सिंह इस पूरे नेटवर्क में तकनीकी सहयोग प्रदान करता था। उसने कई सिम कार्ड उपलब्ध कराए, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग कंपनियों के संचालन और लेनदेन के लिए किया जाता था। पुलिस का कहना है कि इन मोबाइल नंबरों के जरिए कई संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

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इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली बेहद संगठित थी। आरोपी पहले फर्जी दस्तावेज तैयार करते, फिर उनके आधार पर कंपनियों का पंजीकरण कराते और उसके बाद इन कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते। इन खातों के जरिए बड़े पैमाने पर लेनदेन किया जाता, जिससे टैक्स देनदारी से बचा जा सके और अवैध धन को वैध रूप दिया जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल दो आरोपियों तक सीमित नहीं है। जांच में इस गिरोह के अन्य सदस्यों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं, जो अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है।

इस मामले ने एक बार फिर यह उजागर किया है कि फर्जी कंपनियों के जरिए टैक्स चोरी का नेटवर्क कितना व्यापक और संगठित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में डिजिटल निगरानी, बैंकिंग डेटा विश्लेषण और इंटर-स्टेट समन्वय बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि इस तरह के आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ के जरिए नेटवर्क के अन्य कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है, जिससे इस टैक्स चोरी के रैकेट की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।

यह कार्रवाई संकेत देती है कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्ती बढ़ रही है और जांच एजेंसियां अब तकनीकी संसाधनों के जरिए ऐसे संगठित नेटवर्क को बेनकाब करने में अधिक सक्षम हो रही हैं।

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