पटना। बिहार के East Champaran जिले में भारत-नेपाल सीमा के पास एक बड़े साइबर फ्रॉड और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने डिजिटल ठगी के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को उजागर कर दिया है। Ghorasahan क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई में करीब ₹69 लाख नकद, कई मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और अन्य अहम सबूत बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में इस रैकेट के जरिए ₹50 करोड़ से अधिक के लेनदेन का खुलासा हुआ है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात कई स्थानों पर समन्वित छापेमारी कर की। गोरासहन मेन रोड, बाजार क्षेत्र और वीरता चौक समेत आधा दर्जन दुकानों और ठिकानों को निशाना बनाया गया। पुलिस को पहले से ही खुफिया इनपुट मिले थे कि साइबर ठगी से कमाया गया पैसा हवाला चैनलों के जरिए नेपाल भेजा जा रहा है।
छापेमारी के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से ₹69 लाख नकद, 11 मोबाइल फोन, एक करेंसी काउंटिंग मशीन और नेपाल के कई बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए। इसके अलावा, व्हाट्सऐप नंबर और डिजिटल कम्युनिकेशन के जरिए संचालित नेटवर्क के भी प्रमाण मिले हैं, जो इस पूरे रैकेट के संचालन में अहम भूमिका निभा रहे थे।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी साइबर फ्रॉड के जरिए अलग-अलग राज्यों से लोगों को निशाना बनाते थे। ठगी की रकम को सीधे अपने खातों में लेने के बजाय, ये लोग आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। इसके बदले खाताधारकों को कमीशन दिया जाता था, जिससे उन्हें इस अवैध गतिविधि में शामिल किया जाता था।
इसके बाद यह पैसा विभिन्न स्तरों से होते हुए नेपाल के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जहां से उसे आगे हवाला चैनलों के जरिए निकाला जाता था। इस प्रक्रिया में कई फर्जी दस्तावेज, शेल अकाउंट और डिजिटल पहचान का इस्तेमाल किया गया, जिससे जांच एजेंसियों से बचा जा सके।
जांच अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों और नेपाल समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हो सकते हैं। इस बात के भी संकेत मिले हैं कि इस गिरोह में कई और सदस्य शामिल हैं, जो अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
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साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में सोशल इंजीनियरिंग एक अहम भूमिका निभाती है। एक रिसर्चर ने बताया कि ठग पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें छोटे-छोटे फायदे का लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करने लगते हैं। “एक बार जब खाता नेटवर्क में शामिल हो जाता है, तो उसके जरिए बड़ी मात्रा में अवैध लेनदेन किया जाता है, जिसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है,” उन्होंने कहा।
इस मामले ने सीमा क्षेत्रों में बढ़ते साइबर और वित्तीय अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर भारत-नेपाल सीमा जैसे इलाकों में, जहां लोगों का आवागमन और लेनदेन अपेक्षाकृत आसान है, ऐसे नेटवर्क तेजी से पनप रहे हैं।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और छापेमारी की जा सकती है, क्योंकि जांच अभी शुरुआती चरण में है और बरामद डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इनसे मिले डेटा के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके ठिकानों का पता लगाया जाएगा।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते किसी अज्ञात व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें। इसके साथ ही, ऑनलाइन लेनदेन और कॉल्स के दौरान सतर्क रहने की भी सलाह दी गई है।
यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि साइबर अपराध अब केवल ऑनलाइन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हवाला और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ जुड़कर एक बड़े संगठित अपराध का रूप ले चुका है। ऐसे में इसे रोकने के लिए मजबूत निगरानी, तकनीकी क्षमता और अंतर-राज्य तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
