बैंक ट्रांजैक्शन के लिए अब दोहरी वेरिफिकेशन अनिवार्य; डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने के लिए जागरूकता अभियान भी शुरू

“शादी का कार्ड बना साइबर जाल: डिजिटल इनविटेशन से खाली हो सकते हैं बैंक खाते”

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली। आमतौर पर खुशियों और उत्सव का प्रतीक माने जाने वाला शादी का मौसम अब साइबर अपराधियों के लिए नया हथियार बनता जा रहा है। डिजिटल इनविटेशन के बढ़ते चलन के बीच एक नया साइबर फ्रॉड सामने आया है, जिसमें ठग शादी के ई-कार्ड के नाम पर लोगों के बैंक खाते तक खाली कर रहे हैं। इस खतरे को लेकर हाल ही में Future Crime Research Foundation ने अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधी व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल वेडिंग कार्ड भेज रहे हैं। ये कार्ड देखने में बिल्कुल सामान्य और आकर्षक लगते हैं, लेकिन इनमें छिपी .apk फाइल या संदिग्ध लिंक बेहद खतरनाक होती है। जैसे ही कोई व्यक्ति इसे डाउनलोड या ओपन करता है, उसका मोबाइल फोन हैक हो सकता है और उसकी निजी व वित्तीय जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती है।

ठगों का तरीका बेहद सुनियोजित होता है। वे ई-कार्ड को इस तरह डिजाइन करते हैं कि वह पूरी तरह असली लगे। कई बार इसमें परिचित नाम या शादी से जुड़े सामान्य संदेश भी शामिल किए जाते हैं, जिससे व्यक्ति आसानी से भरोसा कर ले। जैसे ही फाइल डाउनलोड होती है, वह मैलवेयर के रूप में फोन में इंस्टॉल होकर मैसेज, बैंकिंग ऐप, ओटीपी और पासवर्ड जैसी अहम जानकारियों तक पहुंच बना लेती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह “सोशल इंजीनियरिंग” का एक नया तरीका है, जिसमें इंसानी भावनाओं—जैसे रिश्ते, भरोसा और उत्सव—का फायदा उठाया जाता है। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है, “आज के साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ लोगों की मानसिकता को भी निशाना बना रहे हैं। शादी जैसे अवसर का उपयोग कर वे लोगों को बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे सिस्टम में सेंध लगाना आसान हो जाता है।”

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इस तरह के फ्रॉड की सबसे खतरनाक बात इसकी गोपनीयता है। शुरुआत में यूजर को कुछ भी असामान्य महसूस नहीं होता और फोन सामान्य रूप से काम करता रहता है, लेकिन बैकग्राउंड में डेटा चोरी जारी रहती है। कई मामलों में ठग बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं या फर्जी लेनदेन को अंजाम देते हैं।

Future Crime Research Foundation ने सलाह दी है कि किसी भी अनजान नंबर या ईमेल से आए डिजिटल इनविटेशन को बिना जांचे-परखे न खोलें। विशेष रूप से .apk फाइल डाउनलोड करने से बचें, क्योंकि यह सीधे फोन में हानिकारक ऐप इंस्टॉल कर सकती है। इसके अलावा किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि जरूर करें।

यदि कोई व्यक्ति इस तरह के साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाता है, तो तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना, आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करना और नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करना प्राथमिक कदम हैं। समय पर शिकायत दर्ज कराने से नुकसान को कम किया जा सकता है और पैसे की वापसी की संभावना भी बढ़ जाती है।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। यूजर्स को केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। अब शादी का डिजिटल कार्ड भी खतरे का संकेत हो सकता है, इसलिए हर क्लिक से पहले सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।

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