बोकारो/रांची। बोकारो कोषागार से कथित अवैध धन निकासी के मामले ने अब और बड़ा रूप ले लिया है। सीआईडी रांची की टीम ने इस प्रकरण में गुरुवार को एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात एक आरक्षी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार कर्मी काजल मंडल को हिरासत में लेकर रांची लाया गया, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह इस पूरे नेटवर्क के मुख्य आरोपी कौशल कुमार पांडेय की सहयोगी के रूप में काम कर रही थी।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, काजल मंडल की भूमिका सामने आने से पहले मैनुअल और डिजिटल दोनों तरह के वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की गई थी। इसी दौरान कई संदिग्ध प्रविष्टियां और लेन-देन पैटर्न मिले, जिसके बाद उसका नाम जांच के दायरे में आया और गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
इस मामले की शुरुआत 7 अप्रैल को हुई थी, जब एसपी कार्यालय के निलंबित लेखापाल कौशल कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया गया था। उसे इस कथित घोटाले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है, जिस पर कोषागार प्रणाली का दुरुपयोग कर अवैध निकासी कराने का आरोप है। उसकी गिरफ्तारी के बाद सीआईडी ने पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू की थी।
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इसके बाद जांच की रफ्तार तेज हो गई। 27 अप्रैल को होमगार्ड जवान सतीश कुमार को गिरफ्तार किया गया, जबकि 29 अप्रैल को एएसआई अशोक भंडारी को हिरासत में लिया गया। अब काजल मंडल की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार कर्मियों की संख्या चार हो गई है, जिससे पुलिस विभाग के भीतर भारी बेचैनी देखी जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क एक सुनियोजित तरीके से लंबे समय तक सक्रिय रहा, जिसमें वेतन और अन्य सरकारी भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर कर धन की निकासी की जाती थी। इसके लिए डिजिटल सिस्टम में बदलाव के साथ-साथ मैनुअल एंट्री में भी गड़बड़ी की गई, ताकि ट्रांजेक्शन को सामान्य दिखाया जा सके।
सीआईडी अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच में फॉरेंसिक अकाउंटिंग, बैंकिंग ट्रांजेक्शन ट्रेसिंग और डिजिटल लॉग एनालिसिस का सहारा लिया जा रहा है। हर लेन-देन की कड़ी को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पैसा किन-किन खातों से होकर गुजरा और किस स्तर पर इसमें बदलाव किया गया।
सूत्रों के अनुसार, काजल मंडल पर आरोप है कि वह लेखा शाखा में प्रक्रियागत कार्यों में शामिल थी और संभवतः कुछ संदिग्ध लेन-देन को आगे बढ़ाने में उसकी भूमिका रही हो सकती है। हालांकि, उसकी प्रत्यक्ष संलिप्तता और आदेशों की श्रृंखला अभी जांच के दायरे में है।
पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियां उससे वित्तीय लेन-देन, आंतरिक संचार और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क में एसपी कार्यालय या कोषागार के अन्य कर्मचारी भी शामिल थे।
लगातार हो रही गिरफ्तारियों ने पुलिस प्रशासन की आंतरिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले ने न केवल वित्तीय निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सिस्टम के भीतर रहकर भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी संभव है।
फिलहाल सीआईडी की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि मनी ट्रेल की पड़ताल पूरी होने के बाद और भी नाम सामने आ सकते हैं। विभाग अब अपने आंतरिक ऑडिट और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
